Talented View:आज की बात माहौल का मज़ा लेने वालों के नाम

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एक मैसेज सोशल मीडिया(Social Media Viral) पढ़ा कि अगर पुलिस लोगों को सड़कों पर देखते ही गोली मारने के आदेश भी निकाल दे तो कुछ लौग तब भी ये चौराहे पर देखने जरूर आएंगे की सच मे गोली मार भी रहे है या नही? ये मेसेज भारतीय जनता के मनोविज्ञान का अच्छे से विश्लेषण कर देता है। हम भारत के लौग माहौल देखने के इतने भूखे होते है कि कोरोना के खतरे के बाद भी चौराहे तक जाकर माहौल का जायज़ा(Corona Virus Villains) लेने से बाज़ नही आ रहे है।

Talented View: कट्टरपंथी कोरोना से दुनिया को बचाने की ज़रूरत

जब हर जरूरी सामान की कुछ संस्थाएं घर पहुंच सेवा प्रदान कर रही है उसके बाद भी हमारे खतरों के खिलाड़ी खुद जाकर बाजार घूम रहे है(PAN India 21 Days Lockdown)। किसी को मिठाई की याद सता रही है, किसी को बालों को रंगने की फिक्र है तो कोई अपने पसंदीदा नमकीन के लिए सड़कों पर भटक रहा है। जिनके यहां आटा नही है वो आटे के लिए भटक रहे है, जिनके यहां आटा है उन्हें ताज़ी सब्जियां चाहिए(Essential And Medical Requirements During Corona Virus Lockdown), जिनके यहां सब्जियां है उन्हें पनीर खाना है, जिनके यहां सबकुछ है तो उन्हें बाहर का माहौल देखकर आना है।

ऐसे लोगों को देखकर यही समझ आता है कि जरूरतें पूरी की जा सकती है लेकिन इच्छाओं को दुनिया में कोई पूरा नही कर सकता। जब रोज़ काम पर जाते थे तो रोतें थे कि फुरसत नही है, समय नही है। लेकिन आज समय है, फुरसत है, परिवार है तो इन्हें ‘मज़ा’ नही आ रहा है। जब बाजार खुले होतें है तब तो लौग मोबाइल फोन में घुसे रहतें है लेकिन अब बाजार बंद है तो इन्हें बाहर जाना है। कोई घर बैठे संतरे छिल रहा है, कोई मिक्चर के दाने अलग-अलग कर रहा है तो कोई बिस्किट के छेद गिन रहा है। लेकिन कोई भी ये सोचकर खुश नही है कि वो परिवार के साथ है, आनंद ले रहा है और फुरसत में दिन बिता रहा है।

लट्ठ पड़ने के बाद भी कर्फ्यू के दुश्मन आ गए धरना देने

कोरोना वाईरस का इलाज तो वैज्ञानिक आज नही तो कल ढूंढ लेंगे लेकिन हमारे इस “रोना वाईरस” का कोई इलाज़ किसी के पास नही है। ऑफिस(Work From Home During Lockdown) जाएंगे तो रोना, ऑफिस नही जाना तो रोना, काम का टेंशन है तो रोना,नही टेंशन है तो रोना, ट्रेवल करना तो रोना, घर बैठना तो रोना, अच्छा खाना न मिले तो रोना, मिल रहा है तो भी रोना, क्या है ये सब? कुछ लौग है जो हर परिस्थिति में खुश होने का बहाना ढूंढ लेतें है लेकिन एक हम है जो हर परिस्थिति में रोने की वजह ढूंढने लगतें है।

प्रधानमंत्री(PM Narendra Modi) ने बोला जो जहां है वहीं रुक जाए। उन्हें सभी जरूरी सामान वहीं मुहैया करवाया जाएगा। लेकिन लौग है कि मानने को तैयार नही है। साधन नही है तो पैदल ही निकल पड़े है(Corona Virus Villains)। अरे भैया क्या करोगे तुम घर जाकर? 2 दिन भी घर मे रुकोगे नही और चौराहे पर माहौल देखने निकल पड़ोगे.. इससे अच्छा वहीं क्यों नही रुक जाते? क्यों खुद के साथ दुसरो की जान भी खतरे में डाल रहे हो?

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ऐसे में पुलिस बेचारी इन्हें डंडे न मारे तो क्या आरती उतारे? आपको अपनी फिक्र नही, परिवार की फिक्र नही, देश की फिक्र नही तो हुजूर आपको सिर्फ डंडे नही गोली पड़नी चाहिए। शुक्र मनाइए भारत(Corona Virus In India) मे लोकतंत्र है। आप अगर चीन या कोरिया में होते तो अब तक आपको गोली मिल गई होती। चौराहे पर जाकर माहौल देखने के चक्कर मे देश के भविष्य को क्यों दांव पर लगा रहे हो? घर मे रहने का मौका मिला है तो इसे इंजॉय करो। लॉक डाउन को कर्फ्यू(Janta Curfew) में तब्दील करने को सरकार को मजबूरन न करो। परिस्थिति की गंभीरता को समझें और अपनी तफरीह की इस आदत को थोड़ा लगाम लगाएं।

– Sachin Pauranik

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