मार ना दे कोरोना का यह डर

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कोरोना वैश्विक महामारी के बीच अब भयावह खबरें भी आनी शुरू हो गयी है। यूरोप के अति विकसित देश भी इस खतरनाक वाईरस(Corona Virus Fear) के आगे घुटने टेकने लगे है। खबर जर्मनी से आ रही है जहां कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। बड़ी संख्या में लोग इससे मारे जा चुके है। इस खतरनाक बीमारी के कारण लोगों में डिप्रेशन भी बढ़ता जा रहा है। जर्मनी के एक मंत्री ने कोरोना वायरस के कारण तनाव में आकर आत्महत्या कर ली है।

जर्मनी के हेस्से राज्य के प्रधानमंत्री वोल्कर बाउफर ने मीडिया को बताया कि कोरोना वायरस के कारण तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित वित्त मंत्री थामस शेफर ने खुदकुशी कर ली है। इस खबर के दो पहलू हो सकतें है। पहला ये की शेफर को अपने देश की चिंता इतनी ज्यादा हो रही थी कि उन्होंने आत्महत्या ही कर ली। इस कदम से उनकी संवेदनशीलता पता चलती है। भारत से इसकी तुलना करें तो हमारे यहां नेता जेल चले जातें है, सज़ा काट लेतें है लेकिन कभी इस तरह डिप्रेशन में नही आते।

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शेफर के आत्महत्या करने के पीछे वजह ये बताई जा रही है कि कोरोना के चलते देश की बर्बाद होती अर्थव्यवस्था को वो देख नही सके। लेकिन उनके इस आत्मघाती कदम पर सवाल भी खड़े हो रहे है। क्योंकि अगर किसी देश की अर्थव्यवस्था खराब हो रही है तो मंत्री जी के आत्महत्या करने से भी हालात तो सुधरेंगे नही। आत्महत्या से ही अगर अर्थव्यवस्था दुरुस्त हो जाती तो वियतनाम जैसे देशों की इकोनॉमी यूँ गर्त में न चली जाती।

दूसरा पक्ष ये है कि कोरोना से किस देश का नुकसान नही हुआ है? इस वैश्विक महामारी की चपेट में पूरा संसार ही आ चुका है। भारत जैसे देश मे जहां करोड़ो लौग रोज़ कमाने-खाने वाले है, वहां भी 21 दिन का लॉकडाउन लगा हुआ है। अकेले भारत को खरबो डॉलर का नुकसान कोरोना के चलते उठाना पड़ेगा। लेकिन किसी मंत्री के आत्महत्या करने से हालात बेहतर तो हो नही जाएंगे? देश के मंत्री अगर ऐसी कमजोर मनोदशा के होंगे तो जनता के मनोबल पर इसका क्या असर होगा? इससे सिर्फ नकारात्मकता और नाउम्मीदी नही बढ़ेगी?

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जो देश जितना ज्यादा विकसित होता है वहां की जनता हालातो से जूझने में उतनी ही कमजोर हो जाती है। यूरोप के देशों से कहीं ज्यादा जिजीविषा भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों में मिलती है। क्योंकि हमारे यहां जीवन पहले से इतना संघर्षमय होता है कि ऐसे छोटे-मोटे झटके हमे विचलित नही कर पाते। कोरोना से हम निसंदेह एक बहुत बड़ा नुकसान उठाने जा रहे है(Corona Virus Fear), लेकिन ठीक है। समय अच्छा भी होता है और बुरा भी।

यूरोप के देशों ने आधुनिक क्षेत्र में उन्नति तो बहुत की है लेकिन भीतर से वे खोखले है। लेकिन हमारे यहां हजार परेशानियां होते हुए भी मानसिक तौर पर हम बेहद मजबूत है। भारत के लोगों पर ईश्वर की ये विशेष कृपा है। बहरहाल, कोरोना के चलते हम सबको मिलकर अपनी इस आत्मशक्ति को और मजबूत करना होगा। क्योंकि आगे का समय और भी कठिनाई भरा हो सकता है।

– Sachin Pauranik

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