Talented View : कमलनाथ के बयान पर हंगामा बंद हो

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क्या यह सच्चाई नहीं है कि यूपी-बिहार से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार की तलाश में हर साल पलायन करते हैं? क्या यह सच नहीं है कि महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और मध्यप्रदेश में बहुत बड़ी आबादी यूपी-बिहार से आए लोगों की बन चुकी है? क्या यह सच नहीं है कि देश के तकरीबन हर राज्य, हर शहर में उत्तर भारतीय कामगार काम नहीं करते हैं? क्या सस्ते लेबर और कम पैसों में काम करने की वजह से इस वर्ग को फैक्ट्री और कारखानों में प्राथमिकता नहीं दी जाती?

क्या यह भी सच्चाई नहीं है कि उत्तर भारतीय एक बार जिस शहर में बस जाते हैं, वहां से दोबारा कभी अपने राज्य लौटने की इच्छा नहीं रखते? ऐसे में सवाल उत्तर भारतीयों को खुद से और अपने नेताओं से पूछना चाहिए कि गंग- यमुना जैसी नदियों का जल है आपके पास, दुनिया की सबसे बेहतरीन उपजाऊ भूमि है आपके पास, सस्ता लेबर है आपके पास, लेकिन इतना सब होते हुए भी आखिर ऐसी क्या वजहें हैं कि आपको यह सब छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब भागना पड़ता है? क्यों राज ठाकरे की मार खाकर भी आप महाराष्ट्र में रहने को मजबूर हैं? क्यों गुजरात से भगाए जाने के बाद भी आप फिर वहीं रहना चाहते हैं?

क्यों तमाम भेदभाव की शिकायतों के बाद भी आप स्वाभिमान की जिंदगी जीने अपने राज्य नहीं लौट आते हैं? कल से कमलनाथ के बयान पर हंगामा मचा हुआ है, जिसमें उनके आशय को समझे बिना अर्थ के अनर्थ निकाले जा रहे हैं। कमलनाथ के बयान को समझने की कोशिश की जाए तो उन्होंने इतना ही कहा है कि सरकारी अनुदान सिर्फ उन्हीं कंपनियों को दिया जाए, जिसमें कम से कम 70 प्रतिशत कार्य स्थानीय निवासी करें। ऐसी कंपनियों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मदद देने का क्या तुक, जहां के सभी कर्मचारी बाहर के प्रदेशों के हो। यह कहने के पहले भी कमलनाथ ने साफ किया था कि मेरी बात को अन्यथा न लिया जाए, लेकिन जिसको हर बात अन्यथा ही लेनी हो, उसका क्या किया जा सकता है? कमलनाथ की बात अन्यथा भी ले ली जाए तो सवाल वही है कि उन्होंने गलत क्या कहा?

यूपी-बिहार या किसी अन्य प्रदेश के लोग अपने राज्य में काम क्यों नहीं ढूंढते? खुद के राज्य को इन लोगों ने नर्क बना लिया है और अब कह रहे हैं पूरा देश हमारा है? यदि किसी उत्तर भारतीय को कमलनाथ या राज ठाकरे की बात इतनी बुरी लगती है तो उन्हें अपने प्रदेश को इतना समृद्ध बनाना चाहिए कि लोग वहां नौकरी को तरसे। यूपी-बिहार के नेताओं को अपने राज्य में उद्योग लगाने से किसी ने रोक रखा है क्या?  उत्तर भारत के नेताओं और जनता को यह सवाल खुद से पूछना चाहिए कि आखिर क्यों कोई उद्योगपति वहां नहीं आना चाहता? क्यों पेयजल की समस्या से जूझते हुए भी गुजरात और महाराष्ट्र अति विकसित तो हम गंगा किनारे रहते हुए भी अति पिछड़े हैं?

यहां उद्योगों की भरमार है तो पूर्वांचल का इलाका पिछड़ा हुआ क्यों है? यूपीएससी, पीएससी में सबसे ज्यादा संख्या में शामिल होकर हम अपने आप को सबसे समझदार मानते हैं, लेकिन खुद के प्रदेश के हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते क्यों जा रहे हैं? क्यों उत्तर भारतीय देशभर में दर-दर की ठोकरें खाते फिर रहे हैं? कमलनाथ के बयान पर उत्तर भारतीयों को गुस्सा होने से पहले अपने गिरेबां में एक बार झांक लेना चाहिए। कमलनाथ, राज ठाकरे जैसे नेताओं के बयान पर यदि आत्मसम्मान को ठेस लगी है तो इसके लिए उन्हें अपने इलाके को उन्नत बनाने पर ज़ोर देना चाहिए। पूर्वांचल में कारखाने खुले और उनमें गुजराती, मराठी लोग नौकरी करें और उत्तर भारतीय खुद बेरोजगार रहे यह बात वे खुद बर्दाश्त करेंगे क्या? यदि नहीं तो कमलनाथ ने कुछ गलत नहीं कहा है। उनके बयान पर कोरा गुस्सा दिखाने से कुछ नहीं होगा बल्कि उससे यही सिद्ध होगा कि उन्होंने जो कहा, वह ठीक ही कहा है। कमलनाथ के बयान पर हंगामा बंद होना चाहिए|

-सचिन पौराणिक

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