गोगोई की मिला राम मंदिर का इनाम ,दूसरी पारी के तैयार गोगोई.

0

वक्त के पहिये को थोड़ा सा पीछे घुमाएं तो पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi Nominated To Rajya Sabha)  सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके देश के संविधान पर खतरा बताते दिखाई देंगे। इसका मतलब था कि वे सत्ता पक्ष के खिलाफ थे और विपक्ष के साथ। लेकिन इसके बाद हालात ऐसे बनते चले गए की रंजन गोगोई ने अपना पाला बदल लिया। उन पर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पद पर रही एक महिला ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगा दिए। इन आरोपों के पीछे कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का हाथ होने की संभावना जताई गई। इसके बाद गोगोई के सुर थोड़े बदल से गए।वक्त के पहिये को थोड़ा और पीछे घुमाया जाए तो गोगोई के पहले जो मुख्य न्यायाधीश थे दीपक मिश्रा उनसे ये उम्मीद थी कि वो सेवानिवृत्त होने से पहले राममंदिर पर निर्णय सुना देंगे। उनकी विचारधारा भी भाजपा (BJP)  के करीब बताई जा रही थी। लेकिन मिश्रा जी चुपचाप रिटायर हो गए और रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) ने राममंदिर समेत कई ऐतिहासिक निर्णय सुना डाले। राममंदिर के अलावा रफाल और कर्नाटक विधानसभा से जुड़े निर्णय भी गोगोई ने ही सुनाए और सत्ता को हर बार राहत पहुंचाई। बीते साल राममंदिर (Ram Mandir)  के पक्ष में निर्णय सुनाकर गोगोई ने दशकों से लंबित मामले को सुलझाकर एक ऐतिहासिक काम को अंजाम दिया।

Congress की Alka Lamba ने AAP के गाल पर जड़ा थप्पड़, Video Viral

इन सबके बाद ये उम्मीद थी ही की उन्हें इसका ‘इनाम’ (Ranjan Gogoi Nominated To Rajya Sabha)  जरूर दिया जायेगा। उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाने की चर्चा भी गर्म थी लेकिन कल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया। राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, जिनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। राष्ट्रपति के इस निर्णय के पीछे सत्ता पक्ष की इच्छा थी जिसका विरोध भी शुरू हो चुका है।भाजपा नेताओं के पुराने बयान और ट्वीट सामने आ रहे है जिनमें में न्यायाधीशों को ऐसे पद देने का विरोध कर रहे थे।जिस काम का विपक्ष में रहते भाजपा विरोध करती थी सत्ता में आने पर खुद भी वही सब करने लगी है। और कांग्रेस (Congress) भी सत्ता में रहते जजों को राज्यपाल बनाती थी, रेवड़ियां बांटती थी लेकिन अब उसे गोगोई का राज्यसभा जाना बर्दाश्त नही हो रहा है। कांग्रेस को शायद याद नही है की गोगोई से पहले एक पूर्व सीजेआई रंगनाथ मिश्रा बाकायदा कांग्रेस में शामिल हुए थे और सांसद बने थे। एक और पूर्व सीजेआई पी. शतशिवम भी केरल के राज्यपाल बने थे।

Congress Press Conference live video : दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या

बात सीधी है। (Ranjan Gogoi Nominated To Rajya Sabha)  अगर पद पर रहते हुए किसी को फायदा पहुंचाया जाता है तो उसकी कीमत तो वसूली ही जायेगी। फिर चाहे वो कोई साधारण बाबू हो या देश का मुख्य न्यायाधीश।इस घटनाक्रम का अर्थ ये है कि कोर्ट के जज भी इंसान है और इंसान की अपनी सोच भी होती है और विचारधारा भी। न्याय की देवी की आंखों में पट्टी जरूर बंधी होती है लेकिन जज साहब को सब कुछ साफ-साफ दिखाई देता है। न्याय की देवी को तो आजीवन कोर्टरूम में ही बैठना है लेकिन जज साहब को अपना भविष्य भी देखना होता है और रिटायरमेंट के बाद का भी सोचना होता है। इसलिये अगर गोगोई साहब राज्यसभा में जा रहे है तो उन्हें कोई रोक नही सकता लेकिन इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता तो सवाल खड़े होंगे ही।

Congress Parliamentary Meet LIVE : सोनिया गांधी बनी रहेगी कांग्रेस संसदीय दल की नेता

Sachin Pauranik

Share.