असल अपराधियों की करें धरपकड़

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आजकल हर कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय है। व्हाट्सएप और फेसबुक दैनिक जीवनचर्या में इतना घुलमिल चुके हैं कि इसके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल हो चुका है। सुबह उठने के साथ जो मोबाइल हाथ में आता है, वह रात को तब ही नीचे रखा जाता है, जब तक नींद को और टाला नहीं जा सकता हो। दिनभर हम मोबाइल में जाने कितने मैसेज, फोटो और वीडियो देख डालते हैं, यह सोचकर कि इससे जानकारी बढ़ेगी। जानकारी बढ़ भी रही है, लेकिन वह सही है या नहीं, इसकी फिक्र किसी को नहीं है। जैसे ही कोई अच्छा मैसेज या वीडियो दिखा नहीं कि लोग बिना सोचे-समझे उसे आगे प्रेषित करने में लग जाते हैं।

व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आज हर कोई किसी भी सन्देश को (सही चाहे गलत) कम से कम हज़ार लोगों तक पहुंचा सकता है। बिना विचारे कोई भी मैसेज प्रेषित करने की हमारी मानसिकता की कीमत देशभर में पिछले कई दिनों में 20 से भी ज्यादा बेगुनाहों ने अपनी जान देकर चुकाई है। जी हां, बच्चा चोरी की देशभर में फैल रही अफवाहों के कारण कई राज्यों में बेगुनाह लोगों पर बेकाबू भीड़ ने हमला करके उनकी जान ले ली है। गुजरात, मध्यप्रदेश, हिमाचल, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा,पश्चिम बंगाल ऐसा कोई राज्य नहीं बचा है, जहां बच्चा चोरी के आरोप में भीड़ ने बेगुनाहों की सांसें न छीनी हो। कहीं पर एक मां पर अपनी ही बेटी के साथ जाते हुए हमला कर दिया जाता है तो कहीं अप्रवासी मजदूरों को बच्चा चोर समझकर मार डाला जाता है। कहीं वनकर्मियों को ही इस शक में मारा जा रहा है तो कहीं राह चलते राहगीरों पर हमला करके उन्हें मौत बांटी जा रही है। इन सब कारस्तानियों के पीछे हाथ बताया जा रहा है सोशल मीडिया का।

फर्ज़ कीजिए आपकी किसी से लड़ाई हो जाए और आपका दुश्मन आपसे बदला लेने के लिए आपके फोटो के नीचे यह लिखकर फैला दे कि इस इंसान से बचकर रहिये, यह एक बच्चा चोर है, जो आपके बच्चों को उठाकर ले जा सकता है। तब आप क्या करेंगे? आपके ही जैसे हजारों-लाखों लोग यह सोचकर आपका फोटो हर ग्रुप पर शेयर करेंगे मानो वे कोई बड़ा पुण्य का काम कर रहे हैं। कोई यह फिक्र नहीं करेगा कि मैसेज में कही जा रही बातें सच है या झूठ बल्कि वे तुरन्त इस पर यकीन कर लेंगे। अब ऐसे में कहीं सार्वजनिक स्थान पर भीड़ आप पर बच्चा चोर समझकर हमला कर दे तो इस परिस्थिति में किसे दोष दिया जाए ? गलती आखिर किसकी समझी जाए ? आपकी, इस भीड़ की, सोशल मीडिया की या फिर बिना सोचे-समझे यह मैसेज भेजने वालों की? यह बात सच है कि देश में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो बच्चों का अपहरण करता है, उनसे भीख मंगवाता है और उनके अंगों की तस्करी करता है। लोगों में इस गिरोह के प्रति गुस्सा बहुत ज्यादा है, लेकिन यह गुस्सा बेगुनाहों पर उतारा जाए तो इसे कतई जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।

सरकारों की यह विफलता ही है कि ऐसे गिरोहों पर आज तक सख्ती से लगाम नहीं लगाई जा सकी है। उपरोक्त केस में सरकार का मानना है कि गलती सोशल मीडिया की है और व्हाट्सएप, फेसबुक को ऐसी अफवाहें रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के लिए कहा गया है, लेकिन सोशल मीडिया की जिम्मेदारी के पीछे सरकार खुद की जिम्मेदारी से छिप नहीं सकती। लोगों का गुस्सा भड़कता ही इसलिए है क्योंकि सरकार कुछ कठोर कदम इस दिशा में नहीं उठा रही है। सोशल मीडिया से बच्चा चोरी के मैसेज हटाना अच्छी बात है, लेकिन यदि बच्चा चोरी के असल अपराधियों की धरपकड़ करके उन्हें सज़ा दिलाई जाए तो ये अफवाहें स्वतः ही रुक जाएंगी।

-सचिन पौराणिक

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