Talented View : अहंकार बड़ा बेकार

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जनता को नेताओं (Cartoon On Sadhvi Arrogance) की कौन सी बात सबसे ज्यादा नापसन्द होती है? या यूं कहें कि नेताओं की किस बात को जनता बिल्कुल बर्दाश्त करना नही करना चाहती? इसका जवाब भ्रष्टाचार, बेईमानी, जनता के मुद्दों पर ध्यान न देना तो है ही। लेकिन जनता आजकल सब समझती है कि नेता है तो भ्रष्ट तो होगा ही। ये बातें उसे ज्यादा उद्वेलित भी नही करती। जनता को सबसे ज्यादा गुस्सा आता है नेताओं के अहंकार को देखकर।

शिवराजसिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मध्यप्रदेश में दशकों तक मुख्यमंत्री रहे लेकिन उनके एक बयान ‘माई के लाल’ से आ रही अहंकार की बू को जनता ने सूंघ लिया और उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखला दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की लहर भाजपा की विजय की वजह जरूर थी लेकिन कांग्रेस नेताओं के अहंकार ने भी जनता के गुस्से को और भड़काया। अन्ना आंदोलन के वक्त से ही कांग्रेस नेताओं का अहंकार जनता को दिखने लगा था जिस पर चोट 2014 में की गई।

(Cartoon On Sadhvi Arrogance) हालिया मामला झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबरदास (Former CM Raghubar Das) का है जिन्हें उनके ही सहयोगी सरयू राय ने पटखनी दी। अपने ही सहयोगियों को अहंकार दिखाना रघुबर को बहुत भारी पड़ा। ऐसा ही एक मामला भोपाल से सामने आ रहा है जहां साध्वी प्रज्ञा अपने अहंकार पर काबू नही कर पा रही है। विमान में यात्रियों द्वारा उनके विरोध का वीडियो पूरे देश ने देखा। मामला यूँ था की स्पाइस के छोटे विमानों में बिज़नेस क्लास तो होता नही। इसलिए सबसे आगे की सीटें ही वीआईपी मान ली जाती है क्योंकि वहां पैर फैलाने की ज्यादा जगह मिल जाती है। साध्वी ने उसी सीट का टिकट बुक किया था।

लेकिन सीट बुक करते वक्त एयरलाइन वालो को ये पता नही था कि साध्वी (Cartoon On Sadhvi Arrogance) व्हीलचेयर पर है। उनकी सीट के पास ही इमरजेंसी एग्जिट था। नियमो के मुताबिक व्हीलचेयर वाले पैसेंजर को इमरजेंसी एग्जिट की सीट नही दी जा सकती। सीट बदलने को लेकर साध्वी भड़क गई। उन्हें पीछे की सीट दी गयी और पीछे के यात्री को आगे बुलाया गया तो साध्वी नाराज़ हो गयी और हंगामा शुरू कर दिया। इस झमेले से विमान की उड़ान में देरी हो गई तो यात्री साध्वी पर भड़क गए। इसी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो देखने के बाद यही लगता है कि साध्वी (Cartoon On Sadhvi Arrogance) में भी अहंकार आ गया है। पहली बात तो वे जनसेवक है और दूसरा उन्होंने गेरुआ वस्त्र धारण कर रखा है। इसलिये उनके सार्वजनिक आचरण पर लोगों की नज़रे लगी रहती है। लेकिन साध्वी ने अपने आचरण से न जनसेवक का धर्म निभाया और न ही गेरुए वस्त्र की गरिमा का ध्यान रखा। अगर वो पीछे बैठकर यात्रा कर लेती तो इससे उनकी छवि निखरती ही। दूसरा जनता के साथ बहस में पड़ने की दूसरी गलती उन्होंने की। जनता के साथ बहस में जनसेवक की जीतने पर भी हार होती है और हारने पर भी। दोनो सूरतों में उनके लिए हार है इसलिए ऐसी परिस्थिति से उन्हें बचना चाहिए था।

इस प्रकरण से साध्वी की छवि को नुकसान पहुंचा है और जनता को उनके अहंकार की बू भी आ गयी है। साध्वी (Cartoon On Sadhvi Arrogance) अपनी लोकछवि का ग्राफ तेज़ी से गिराती जा रही है। शायद सांसद बनने से मिली सफलता वो पचा नही पा रही है। अभी कोई चुनाव नही है इसलिए साध्वी को घबराने की जरूरत नही। लेकिन जनता ऐसे आचरण को जल्दी भूलती नही है। जनसेवक में आने वाला अहंकार उसके केरियर के लिए घातक सिद्ध होता है। साध्वी को जनसेवक न सही कम से कम गेरूआ वस्त्र की मर्यादा को ही ध्यान में रखकर अपने आचरण में सुधार ले आना चाहिए। नही तो पहले से मुश्किल दौर से गुज़र रही भाजपा के लिए साध्वी नई परेशानियां खड़ी करेंगी।

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– सचिन पौराणिक

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