प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रद्रोही कहना उनके साथ ज्यादती है!

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देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। (Calling Protesters Anti Nationalists) इसे लेकर दिल्ली के शाहीनबाग (Shaheen Bagh Movement) में बीते कई दिनों से महिलाओं का धरना जारी है। इस धरने को 40 दिन से भी अधिक का समय हो गया है। वहीं शाहीन बाग (Shaheen Bagh) की तरह ही देश के दूसरे हिस्सों में भी धरना और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस प्रदर्शन में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के अलावा दूसरे लोग भी शामिल हो रहे हैं। इन सभी लोगों का विरोध सिर्फ इसी बात को लेकर है कि इस कानून के जरिए सरकार डर का माहौल बनाने की जो कोशिश कर रही है, उसे रोका जाना चाहिए। वहीं दूसरे लोगों की नज़र में यह प्रदर्शन करने वाले लोग देश विरोधी हैं। (Calling Protesters Anti Nationalists)  इन्हें राष्ट्रद्रोही करार दिया जा रहा है। वहीं कुछ लोगों यहां तक कि खुद प्रधानमंत्री का आरोप तो यह है कि शाहीनबाग (Shaheen Bagh) या दूसरे स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोग राष्ट्रविरोधी हैं। इस बात पर भी आज बड़ी बहस हो रही है। ऐसे में अब सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोग असल में हैं क्या यह भी एक प्रश्न है।

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देशभर में हो रहे CAA के विरोध का खूबसूरत पहलू…

देशभर में हो रहे CAA के विरोध का खूबसूरत पहलू…देशभर में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर दिल्ली के शाहीनबाग में बीते कई दिनों से महिलाओं का धरना जारी है। इस धरने को 40 दिन से भी अधिक का समय हो गया है। वहीं शाहीन बाग की तरह ही देश के दूसरे हिस्सों में भी धरना और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस प्रदर्शन में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगांे के अलावा दूसरे लोग भी शामिल हो रहे हैं। इन सभी लोगों का विरोध सिर्फ इसी बात को लेकर है कि इस कानून के जरिए सरकार डर का माहौल बनाने की जो कोशिश कर रही है, उसे रोका जाना चाहिए। इसी पर केंद्रित है आज का ‘टैलेंटेड व्यू‘।

Talented India News द्वारा इस दिन पोस्ट की गई बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

दूसरे अर्थों में हम देख रहे हैं कि सीएए या एनआरसी (CAA-NRC) के जरिए देश में सिर्फ माहौल बनाने और बिगाड़ने के अलावा कुछ नहीं किया जा रहा है। (Calling Protesters Anti Nationalists)  यह धीमे-धीमे शुरु हुई राजनीति का ही एक हिस्सा है, जिसे आज लोगों के दिमाग में इस तरह से बैठा दिया गया है कि वे जानते ही नहीं हैं कि वे जो कर रहे हैं, इसका क्या मतलब होता है। जैसे आप जब भी सीएए (CAA) के पक्ष में या उसके गलत पहलूओं के बार में किसी से बात करते हैं, तो वह आप पर ही हावी हो जात है। वहीं इस तरह के लोगों का पहला तर्क यह होता है कि आप चाहे जो कोई भी हो पहले आप एक हिंदू हैं, इसलिए हमें हिंदुत्व को बचाना है। मुझे एक पत्रकार या लेखक के तौर पर ऐसा लगता है कि एक हिंदू होने से पहले मेरा एक हिंदुस्तानी होना जरुरी है और हिंदुस्तान में हम सभी शुरु से एक रहते आए हैं। यहां यदि लोग बात करते हैं तो वह बात हिंदु-मुस्लमान की होती है। यानि अलगाव की बात में भी ये दोनों ही समुदाय एक-साथ हैं। इसके अलावा हम जब भी नाम लेते हैं कई नाम ऐसे हैं जो युगल में ही अच्छे लगते हैं, जैसे- राम-रहीम, ईश्वर-अल्लाह, हिंदू-मुसलमान। तो जब ये नाम शुरु से साथ रहते आए हैं, तो फिर इन्हें अलग करने की साजिश क्यों। सोचिए, कैसा रहेगा जब देश में केवल हिंदू ही हिंदू बचेंगे। या किसी एक ही मज़हब के लोग होंगे। साथ ही तर्कों से आंख मिलाने की बजाय आज की पीढ़ी सोशल मीडिया पर फैलाए गए गलत तथ्यों को मानने में इतनी माहिर है कि, वह अपने उपर का सच मानने को तैयार ही नहीं है।

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देश का माहौल खराब करने वालों में यदि 1 प्रतिशत (Calling Protesters Anti Nationalists)  से भी कम मुसलमान होंगे, तो उतनी ही तादाद में हिंदू भी हैं। तभी रामभक्त गोपाल और कपिल गुर्जर (Gopal and Kapil Gurjar) जैसे लोग जामिया और शाहीनबाग (Jamia And Shaheen Bagh)  में जाकर लोगों को आज़ादी का मतलब समझाते हैं।ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों में जो प्रदर्शन हो रहे हैं, उन्हें किसी भी तरह से देश से अलगाव के प्रतीक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि उन्हें इस देश की विविधता का एक परिचय मानना चाहिए। यदि देश में ऐसे प्रदर्शन और विरोध होंगे ही नहीं तो इस देश में और दूसरे राष्ट्र जहां तानाशाही कायम है, अंतर क्या रह जाएगा। भारत में जो भी विरोध करते हैं, वह देश के ही नागरिक हैं। (Calling Protesters Anti Nationalists)  उन्हें राष्ट्रदोही नहीं बल्कि राष्ट्र के नागरिक के रुप में देखा जाना चाहिए। रही बात सीएए के विरोध की तो जहां भाजपा या केंद्र सरकार लगातार देश के लोगों को सीएए पर जागरुक कर रही है, यदि इन लोगों से भी हमारे नेता मिलें और उन्हें समझाएं तो वे भी अपना विरोध वापस ले सकते हैं। लेकिन उन्हें समझाने के बजाय उन्हें केवल गलत निगाहों से देखा जाना हमारे देश के उन नागरिकों के साथ ज्यादती सा लगता है।

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– राहुल कुमार तिवारी

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