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Talented View : बीजेपी गिराएगी कर्नाटक सरकार!

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राजनीति के खेल बड़े निराले है। यहां सबसे बड़ी पार्टी ही सत्ता में आएगी ऐसा कुछ तय नही होता है। छोटे दल मिलकर भी बड़े दल को दरकिनार करने की पूरी ताकत रखतें है। जब कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने वाली भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था तभी से ये कयास लगने शुरू हो गए थे कि कर्नाटक में सरकार ज्यादा दिन टिकेगी नही। इस बीच केंद्र के भी चुनाव होने थे इसलिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने भी जोड़तोड़ की ज्यादा कोशिशें की नही। लेकिन अब हालात अलग है।

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राजनीति के “ट्रेजिडी किंग” बन चुके कुमारस्वामी को आंसू बहाने की एक और वजह मिल गयी है। ताज़ा मामले में कांग्रेस के 10 और जेडीएस के 3 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए है। इस्तीफों की खबर बाहर आते ही राज्य की राजनीति में हड़कप मच गया। राज्य के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी अमेरिका में थे लेकिन ऐसी खबरों के आते ही वो तुरन्त भारत लौट आये है और हालात सम्हालने में लग गए है।

जब से राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनी है तब से ही सरकार के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए थे। इस बीच कई बार सार्वजनिक मंचो से कुमारस्वामी ने आंसू बहाए और गठबंधन सरकार चलाने की मजबूरियां गिनाई। कई बार राज्य में तख्तापलट की कोशिशें भी हुई किन्तु हर बार कुमारस्वामी ने हालात काबू में कर लिये। लेकिन इस बार ऐसा लगता है की मामला कुछ ज्यादा बिगड़ गया है। दरअसल कर्नाटक विधानसभा में कुल 225 सदस्य है।

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2018 में इनमें से 222 सीटों के लिए चुनाव हुए जिनमें भाजपा के 105, कांग्रेस के 80 और जेडीएस के 37 विधायक चुने गए। हालात भांपते हुए कांग्रेस ने तुरन्त जेडीएस के सामने आत्मसर्मपण कर दिया और उनका मुख्यमंत्री स्वीकार कर लिया था। अब परिस्थितियों को खंगाला जाए तो बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो जाने की सूरत में दोनों के पास 105 विधायक हो जाएंगे। एक निर्दलीय विधायक नागेश ने भाजपा के समर्थन का ऐलान कर दिया है जिससे भाजपा के पास कुल 106 विधायक हो जाएंगे।

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इन विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में कुल विधायक 211 रह जाएंगे। उनमें एक स्पीकर है। इसलिये बहुमत का आंकड़ा 106 पर अटक जाएगा और इतने विधायक भाजपा ने कबाड़ लिए है। इसलिए इस बार ऐसा लगता है कि भाजपा कर्नाटक में सत्ता हथिया ही लेगी। और कनार्टक में सत्ता का ये बदलाव निर्विघ्न सम्पन्न होता है तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की धड़कनें बढ़ जाएंगी। क्योंकि कर्नाटक के बाद भाजपा की नज़र किसी राज्य पर है तो वो मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ बैसाखियों के सहारे कुर्सी पर बैठे है। भाजपा वाले इन बैसखियों को हटाना अच्छे से जानते है। केंद्र में पूर्ण बहुमत की सत्ता प्राप्त करने के बाद ये दो बड़े राज्यों की सत्ता भाजपा जरूर हासिल करना चाहेगी। कर्नाटक के नाटक के बाद अगला रंगमंच मध्यप्रदेश का होगा।

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