भाजपा भी कर रही तुष्टिकरण की राजनीति

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करोड़ों बांग्लादेशी और रोहिंग्या इस देश में अवैध रूप से रह रहे हैं| उनके खिलाफ कार्यवाही का मामला सुप्रीम कोर्ट में है| राममंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, धारा 370 और समान नागरिक संहिता का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन सरकार की वरीयता पर जरा गौर फरमाइये। सरकार अध्यादेश लाई उस एससी-एसटी एट्रोसिटी कानून के लिए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना सा संशोधन किया था कि बिना जांच के किसी की गिरफ्तारी न हो।

कल आगरा में एक सभा को संबोधित करने जा रहे कथावाचक और लोकप्रिय संत देवकीनंदन ठाकुरजी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ठाकुरजी को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वो बिना अनुमति के सभा को संबोधित करने जा रहे थे जबकि वहां पर धारा 144 लागू थी। गौरतलब है कि ठाकुरजी ने इस काले कानून के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए सरकार को सीधे चेतावनी दी थी और कहा था कि किसी की भी बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। एक हिन्दू संत की गिरफ्तारी से धर्म, देश, संस्कृति सब खतरे में आ जाता, लेकिन शुक्र है कि यह गिरफ्तारी उस प्रदेश में हुई, जहां भगवाधारी योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है और भाजपा की सरकार है।

गलती से भी यह गिरफ्तारी कांग्रेस या अन्य किसी वामपंथी सरकार शासित प्रदेश में हो जाती तो तत्काल प्रभाव से उस सरकार को हिन्दू-विरोधी घोषित कर दिया जाता। अब भक्तों की उलझन यह है कि इस मुद्दे पर ठाकुरजी का साथ दिया जाए या योगीजी का? वैसे ठाकुरजी की मांग बिल्कुल वाज़िब है। वो इस एक्ट के खिलाफ कतई नहीं है। उनका सिर्फ इतना कहना है कि किसी की भी बिना जांच गिरफ्तारी होना गलत है। कोई भी बुद्धिजीवी उनकी इस बात से इत्तेफ़ाक रखेगा की झूठी शिकायत पर किसी को भी सलाखों के पीछे डाल देना समझदारी भी नहीं है और कानूनसम्मत भी नहीं है। लेकिन दलितों के वोट पाने को बेकरार सरकारों को कहां इन सबकी फिक्र है। कैसे भी वोट मिल जाये और सरकार बन जाए इससे ज्यादा की सोच किसी राजनीतिक दल में आज की तारीख में नहीं है।

नरेंद्र मोदी सरकार से जरूर जनता को ये उम्मीद हो गयी थी कि कम से कम ये सरकार वोटबेंक की सियासत नहीं करेगी। लेकिन अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले मोदीजी ने जनता की इस गलतफहमी को भी दूर कर दिया। ये सरकार भी वोटबेंक की राजनीति में उतनी ही डूबी हुई हैं जितनी कि अन्य सरकारें।

पहले की सरकारें अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण करती थीं तो यह सरकार दलितों के तुष्टिकरण में रत है। पूर्ण बहुमत की सरकार के पास करने को हजार काम थे, जिन्हें जनता याद रखती, लेकिन इन्होंने काम किया एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का। शाहबानो केस में जो तुष्टीकरण की राजनीति की शुरुआत राजीव गांधी ने की थी वही तुष्टिकरण की राजनीति मोदीजी ने 2018 में कर दी। दोनों में बुनियादी फर्क क्या है? जो मौका भाजपा को 2014 में मिला था, वैसा मौका दोबारा किसी दल को मिल पाना बहुत मुश्किल है।

देश को इस पूर्ण बहुमत की सरकार से बहुत उम्मीदें थी, लेकिन यह सरकार भी तुष्टिकरण की राजनीति के लिए ही याद की जाएगी। समय आहिस्ता से करवट ले रहा है और जैसी परिस्थितियां 2014 के चुनाव से पहले बनी थी, वैसी ही फिर बनने लगी है। उस वक्त स्वामी रामदेव पर कांग्रेस सरकार ने वक्रदृष्टि डाली थी| आज देवकीनंदन ठाकुरजी को गिरफ्तार किया गया है। हिंदुत्व का चोला पहनकर सत्ता में आने वाली भाजपा बताए कि क्या यही है आपका संतों के प्रति सम्मान? देवकीनंदनजी का कसूर क्या है?

गलत को गलत कहने पर सरकार किसी को भी गिरफ्तार कर लेगी? सत्ता के अहंकार में चूर भाजपा का नेतृत्व आज अपनी मूल विचारधारा से ही मुंह मोड़ चुका है। बिना विचारधारा के राजनीतिक दल का खड़े रह पाना बहुत मुश्किल है। इस अहंकार का जवाब जनता कैसे देती है ये देखना दिलचस्प रहने वाला है।

-सचिन पौराणिक

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