Talented View : सदन में महिला का अपमान, क्या यही है नया हिन्दुस्तान ?

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कहतें है इंसान का असली स्वभाव ज्यादा देर तक छुपाकर नही रखा जा सकता। वक्त-बेवक्त इंसान का असली चरित्र बाहर आ ही जाता है। ऐसे ही समाजवादी पार्टी के एक सांसद है आज़म खान जो बार-बार महिलाओं के बारे में ऐसी बातें कहतें है, जिससे महिलाओं की इज़्ज़त धूल में मिल जाती है। ताज़ा मामले में शुक्रवार को संसद सदन में अध्यक्षता कर रही रमा देवी को ही निशाने पर ले लिया।

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Today Cartoon On Azam Khan Rama Devi Remark

आज़म खान ने शिष्टाचार और महिला सम्मान की धज्जियां उड़ाते हुए रमा देवी पर अपमानजनक टिप्पणी की। इससे ज्यादा शर्म की बात ये रही कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उनके पास ही बैठे थे। बजाय आज़म को रोकने के अखिलेश खुद इस दौरान मुस्कुराते दिखाई दिए। बाद में जब इस बयान पर हंगामा मचा तब भी अखिलेश ने आज़म का बचाव ही किया। सोचने वाली बात है की संसद सदन में भी अगर नारी का सम्मान आज़म नही कर रहे तो संसद के बाहर वो क्या-क्या न करते होंगे? टिप्पणी मे कुछ भी ग़लत नही देखने वाले अखिलेश को सोचना चाहिए कि यही टिप्पणी अगर आज़म ने उनकी पत्नी डिंपल या फिर माताजी पर की होती तब भी क्या वो यूँ ही चुप रहते? तब भी क्या अखिलेश ऐसे ही मुस्कुराते हुए मजे लेते?

सवाल महिलाओं के मुद्दों और सरकार को कोसने वाली जया बच्चन से भी है। जब उनकी ही पार्टी के नेता आज़म खान कभी जयाप्रदा के अंडरवियर का रंग बतातें है तो कभी संसद में महिला सांसद को आंखों में आंखे डालकर देखते रहने की गुस्ताखी करतें है तब उनके मुंह से एक शब्द क्यों नही निकलता? जया बच्चन और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को पूरे देश के मामलों की फिक्र तो होती है लेकिन खुद के बिगड़ैल नेताओं में उन्हें कोई बुराई नज़र नही आती। संसद में आज़म के बयान पर ठहाका लगाने वाले निर्लज्ज नेताओं को भी शर्म से कहीं चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिये।

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समझ नही आता कि मुलायम-अखिलेश की ऐसी कौन सी मजबूरी है जो आज़म जैसे बेशर्म नेता को इन्हें झेलना पड़ रहा है? हो सकता है आज़म यादव कुनबे के कुछ ऐसे राज़ जानतें है जिसकी वजह से उनकी हर बकवास पर उन्हें पार्टी नेतृत्व का भरपूर साथ मिलता है। लेकिन अब हमें गंभीरता से सोचना होगा की जिन प्रतिनिधियों को चुनकर हम संसद भेजतें है क्या वो वाकई सदन के लायक है? संसद में कुछ भी बोलने पर विशेषाधिकार के तहत बाहर केस दर्ज नही हो सकता। लेकिन क्या ऐसें नेताओं की सदस्यता बरकरार रहनी चाहिये? महिलाओं की इज़्ज़त उछालने वाले सांसद को क्या सदन मे बैठने का अधिकार होना चाहिये? रमा देवी ने आज़म की संसद सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर से मांग की है। क्या उनकी मांग को सभी दलों का साथ नही मिलना चाहिये?

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आज़म खान एक वरिष्ठ नेता है लेकिन उनके बयान किसी सड़कछाप गुंडे की ही तरह लगतें है। उन पर जमीन हथियाने के अलावा और भी कई मुक़दमे रामपुर में दर्ज है। ऐसे आपराधिक छवि के नेता को बचाकर अखिलेश और जया बच्चन क्या सिद्ध करना चाहतें है? अगर संसद में भी महिलाएं सुरक्षित नही है तो जितने अपराध महिलाओं के खिलाफ देशभर में हो रहे है तो इसमें ताज़्ज़ुब किस बात का है? आज़म की सदस्यता खारिज़ होती है तो सदन की गरिमा पुनर्स्थापित होगी अन्यथा आगे दूसरे सांसद भी ऐसी ही मर्यादा भंग करेंगे और हम सिर्फ देखते ही रह जायेंगे।

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