केजरीवाल के लिए जीत का जश्न, बाकी दलों के लिए उठे बड़े प्रश्न

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दिल्ली चुनाव (Cartoon On Delhi Elections 2020)  के नतीज़े चौंकाने वाले रहे। चोंकाने का काम केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की प्रचंड विजय ने कम बल्कि भाजपा की एकतरफा पराजय ने ज्यादा किया। कांग्रेस के बारे में बात करने का कोई तुक नही क्योंकि वो न सुनने को तैयार है न सुधरने को। केजरीवाल की एकतरफा जीत ने पुरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस जीत के मायने बहुत गहरे और दूरगामी परिणाम वाले सिद्ध होंगे।दिल्ली चुनाव नतीजों मे भाजपा (BJP)  के लिये कई सबक छुपे हुए है। सबसे पहला सबक ये की कपिल मिश्रा और तेजिंदर बग्गा की हार ने ये समझा दिया है कि ‘ट्विटर’ से न चुनाव लड़े जा सकतें है और न ही जनता का समर्थन जुटाया जा सकता है। धरातल पर जनता से सीधा संवाद आज भी चुनाव जीतने की एकमात्र कुंजी है। दूसरा ये की सिर्फ योजना लागू करने से ही काम नही हो जाता बल्कि उसका फायदा जनता तक पहुंचे ये भी देखा जाना चाहिए।प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना में इतने फ़िल्टर है कि कोई आम आदमी इसका लाभ ले ही नही सकता। मध्य वर्ग जिसे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा दरकार है वो इस योजना में शामिल ही नही है। जबकि केजरीवाल दिल्ली में सभी नागरिकों को निशुल्क स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं दे रहे है। इसलिए भाजपा का ये दांव दिल्ली में चल नही पाया।

तीसरा ये की दिल्ली जैसे छोटे से राज्य में पूरी सरकार के चुनाव (Cartoon On Delhi Elections 2020) प्रचार में उतर जाने से पूरा फायदा केजरीवाल को मिला। क्योंकि जनता में ये संदेश गया कि एक केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को हराने के लिये इतने लौग लगे हुए है।गुजरात का मुख्यमंत्री रहते नरेन्द्र मोदी के पक्ष में भी इसी तरह जनता की सहानुभूति बनती थी जिस तरह दिल्ली में केजरीवाल के लिये बनी। केजरीवाल ने खुद को जनता का बेटा बनाकर भावनात्मक सम्बन्ध बना लिया और भाजपा ने उन्हें ‘आतंकवादी’ कहकर जनता के गुस्से को ही भड़काया। चौथा सबक ये की मच्छर मारने के लिए कभी तलवार का इस्तेमाल नही करना चाहिये। क्योंकि अव्वल तो तलवार से मच्छर मरेगा नही और मर भी गया तो खुद के शरीर को भी हानि पहुंचेगी। भाजपा ने पूरे मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्रियों को केजरीवाल के खिलाफ लगाकर बड़ी गलती की। जीतने के बाद भी उन्हें इसका कोई यश नही मिलना था लेकिन अब हार के बाद बेइज्जती जरूर हो रही है।पांचवा ये की जनता के बुनियादी मुद्दों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए कोई अच्छा काम कर रहा है तो उसका मजाक नही उड़ाना चाहिये। भाजपा ने केजरीवाल का मज़ाक उड़ाया, निजी हमले किये इससे जनता में गलत संदेश गया। छठा सबक ये की जनता को मूर्ख नही समझना चाहिए। राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री के चेहरे पर जनता का साथ भाजपा को मिलता आया है। लेकिन हर चुनाव में वही दाव काम नही करेगा। भाजपा को समझ आ जाना चाहिए कि हर बारात का दूल्हा ‘नरेंद्र मोदी’ (Narendra Modi) को नही बनाया जा सकता।आखिर में विनोद के तौर पर देखें तो ये चुनाव नतीजे तीनो दलों के लिये खुशियां लेकर आये है। आम आदमी पार्टी (AAP) की सीटें कम जरूर हुई लेकिन सत्ता में शानदार वापसी भी हो गयी। भाजपा ये सोचकर खुश हो सकती है कि उसका वोट शेयर और सीटें दोनो बड़े है। और कांग्रेस (Congress) इस चुनाव में गीतासार को आत्मसात करते हुए उतरी थी कि ‘तुम क्या साथ लेकर आये थे और क्या लेकर जाओगे?’ फिर भी भाजपा की हार की खुशी कांग्रेस वालों को अपनी हार का ग़म भुलाकर मुस्कुराने का मौका दे रही है।भाजपा (Narendra Modi)  को कांग्रेसमुक्त भारत करने के दुष्परिणाम इस चुनाव में समझ आ रहे होंगे। क्योंकि कांग्रेस का वोट शेयर कम होता भी है तो वो भाजपा की झोली में कभी नही गिरता।कांग्रेस का वोटर (Cartoon On Delhi Elections 2020)  अन्य विकल्प के पास चले जाएगा लेकिन भाजपा (BJP) के साथ कभी नही आएगा। कांग्रेस की स्थिति दिल्ली में मजबूत होती तो केजरीवाल के लिए मुश्किलें बढ़ सकती थी और भाजपा के लिए स्थितियां अनुकूल हो जाती। फिलहाल आम आदमी पार्टी के लिए मौका जश्न मनाने का है, भाजपा (BJP) के लिये अपने प्रदर्शन पर चिंतन का और कांग्रेस के लिऐ ये किस बात का मौका है ये फिक्र उनके नेताओं को ही नही है तो इसके लिए हम भी क्यों खामखा परेशान हों..

Cartoon On Delhi Elections 2020 | Cartoon On Arvind Kejriwal | AAP

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Sachin pauranik

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