कश्मीर को लेकर अमित शाह की सोच…?

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एक रोचक तथ्य पर नज़र डालतें है। जम्मू-कश्मीर में 87 सीटों पर चुनाव होते हैं, लेकिन कुल विधानसभा सीटों की संख्या 111 है। बची हुई इन 24 सीटों पर इसलिए चुनाव नहीं होते क्योंकि ये 24 सीटों को पाक अधिकृत कश्मीर के लिए छोड़ा गया है। इसका मतलब है कि संविधान में इस तरह के प्रावधान करने वालों के मन में जरूर कहीं ये उम्मीद रही होगी कि पूरा कश्मीर एक दिन भारत का होगा। तब संविधान में बदलाव न करना पड़े इसीलिए पाक के कब्जे वाली सीटें भी पहले ही जोड़ ली गयी हैं।

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खैर बात करते हैं जम्मू-कश्मीर विधानसभा की ताज़ा स्थिति की। कश्मीर में विधानसभा की 46, जम्मू में 37 और लद्दाख में 4 सीटें हैं। यह एक तथ्य है कि  कश्मीर मुसलमान बहुल इलाका है और जम्मू-लद्दाख हिन्दू बहुल। ज्यादा सीटों की वजह से जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री कश्मीर का ही बनता आया है। अब्दुल्ला और मुफ़्ती खानदान इस राज्य में एकछत्र राज करते आए हैं, लेकिन अब मोदी सरकार पार्ट-2 के सत्ता संभालने और अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद ये हालात बदलने की उम्मीद जगी है।

शाह राज्य में परिसीमन करवाना चाहतें हैं क्योंकि कहा जा रहा है कि कश्मीर में जानबूझकर विधानसभा की ज्यादा सीटें दी गयी हैं, जिससे राज्य पर कश्मीर का प्रभाव ज्यादा हो। जनसंख्या के लिहाज से देखें तो जम्मू में विधानसभा की अधिक सीटें होना चाहिए। राज्य में आखिरी बार परिसीमन वर्ष 1995 में हुआ था। इसलिए अब 24 साल बाद प्रस्तावित परिसीमन से इस गड़बड़ी को दूर करने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि राज्य से धारा 370 और 35-ए को हटाने की दिशा में ये कदम बढ़ाया जा रहा है।  भाजपा के घोषणापत्र में धारा-370 हटाने का जिक्र सालों से किया जा रहा है।

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इस बार चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने खुलकर ये कहा भी था कि हम धारा 370 हटाकर ही मानेंगे और अब शाह को गृहमंत्री बनाए जाने के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि धारा 370 अब ज्यादा दिन की मेहमान नहीं है। अमित शाह ऐसे शख्स हैं जो नतीज़ों पर यकीन करते हैं। उनके जैसा जुझारू कार्यकर्ता जो काम हाथ मे लेता है वो खत्म करके ही दम लेता है। लोग क्या कहेंगे इसकी उन्हें कोई फिक्र नहीं होती। ऐसे लोग अक्सर वो काम कर डालते हैं जो असम्भव दिखाई पड़ते हैं।

अमित शाह के ट्रेक रिकॉर्ड को देखते हुए ही महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला घबराए हुए हैं। इन दोंनो परिवारों ने राज्य पर सालों तक हुकूमत की और सत्ता का भरपूर दोहन किया। अब अगर परिसीमन के बाद जम्मू की सीटें बढ़ती हैं तो यह तो पक्का हो जाएगा कि राज्य में सत्ता केंद्र कश्मीर से जम्मू में शिफ्ट हो जाएगा।

इसके बाद भाजपा जम्मू-कश्मीर में भी अपने बूते सरकार बना सकती है। केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा के आते ही अमित शाह अपने कठोर अनुशासन और सख्त रवैये के साथ धारा 370 और 35-ए किसी भी दिन खत्म कर देंगे। इस आर्टिकल को कहीं सहेजकर रख लीजिए क्योंकि अमित शाह यह काम करके ही दम लेंगे ये साफ दिखाई दे रहा है।  केंद्र और राज्य की मजबूत सरकार, सुरक्षा बलों का आतंकियों को लगातार ढेर करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहले ही भारत को प्राप्त हो चुका है।

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पाकिस्तान इस कदम से बिलबिलाएगा जरूर लेकिन कुछ कर नहीं पाएगा। 2 बार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान वैसे ही परमाणु बम का नाम लेना भी भूल चुका है। ये धारा हटने के बाद देशभर से आकर कोई भी भारतवासी कश्मीर में ज़मीन खरीद सकेगा, व्यापार भी कर सकेगा और आराम से रह भी सकेगा। ऐसा होता है तो एक देश-एक संविधान-एक ध्वज की सोच रखने वाले भाजपा के पितृपुरुष श्यामाप्रसाद मुखर्जी को ये सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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