विचित्र दिमाग

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इंसानी दिमाग बहुत ही जटिल है। वैज्ञानिक बताते है की दिमाग में इतने सूक्ष्म तंतु विद्यमान है जो हमारी हर छोटी से छोटी याददाश्त को भी सहेजकर रख लेते है। सम्मोहन की अवस्था में जब विशेषज्ञ किसी व्यक्ति से उसके बचपन के किसी दिन को याद दिलाते है तो सम्मोहित अवस्था में वो उस दिन का अशरक्षः वर्णन कर सकता है। दिमाग की एक खूबी ये भी है की इसमें पीछे की याददाश्त हमेशा मिटती रहती है और नई याददाश्त बनती रहती है।

वैज्ञानिक कहते है की ऐसा होना अत्यधिक आवश्यक है क्योंकि ऐसा न होने की अवस्था में मनुष्य का मानसिक संतुलन हिल सकता है। इंसानी दिमाग की ये खूबी बहुत विशेष होती है। इसकी विशेषता आम जनमानस नही समझ पाता लेकिन चतुर लौग जो अक्सर राजनेता होते है, वे बहुत अच्छे से समझ लेते है। इसीलिए तो नेता अक्सर ऐसी उटपटांग बातें भी कह जाते है जिनका सर,पैर नही होता, लेकिन फिर भी वे आत्मविश्वास से ये सब कहतेँ चले जाते है क्योंकि उन्हे हमारी याददाश्त पर हमसे भी ज्यादा भरोसा होता है।

तभी तो एक योगाचार्य 2014 के बाद 30रुपए लीटर पेट्रोल की बात कह देते है, इसीलिए कोई राजनेता 2022 तक किसानों की आय दुगुनी कर देने की बात कर देता है, कोई नेता देश से भ्रष्टाचार खत्म करने और जनलोकपाल लागू करने की बात कर देता है तो कोई आलू से सोना निकाल देने का दावा ठोक देता है। ऐसा नहीं है की ये सभी जनता को मूर्ख या स्वयं को ज्यादा समझदार मानते है। ऐसा सिर्फ इसलिए है की इन्हे इंसानी दिमाग की कार्यशैली पर पक्का विश्वास होता है। ये जानते है की भारत की जनता को सुबह खाया हुआ खाना याद नहीं रहता तो इनकी बकवास भला कैसे याद रह सकती है?

इसीलिए हर पांच साल में होने वाले चुनावों में देश के नेता वही वादे दोहराते रहते है जनता भी बेचारी हर बार इनकी बातें मानकर आसमानी बातों को सच मान लेती है। और इस बात का भारत के नेता लाभ ही लाभ उठाएं चले जाते है। नही तो अगर जनता थोड़ा भी याददाश्त रखने लगे तो इन लोगों को दौड़ा दौड़ाकर पीटने की नौबत किसी भी समय आ सकती हैं।

Sachin Pauranik

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