“बॉयकॉट गैंग” का सच

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करण जौहर की फिल्म “लाइगर” पीट गई। इससे पहले आमिर खान की “लाल सिंह चड्ढा” दर्शकों को तरस गई। “शमशेरा” तो इस तरह फ्लॉप हुई की बॉलीवुड वाले सकते में आ गए। इधर “ब्रह्मास्त्र” और “पठान” को भी बॉयकॉट करने की अपील शुरू हो गई है। लेकिन क्या ऐसा सच में है की किसी फिल्म का सोशल मीडिया में बॉयकॉट होने से वो फिल्म फ्लॉप हो सकती है? इस पर आज थोड़ा सभी पहलुओं को देखना बहुत जरूरी हो गया है।

महामारी के बाद और सुशांत सिंह राजपूत की (आत्म) हत्या के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आखिर क्या अंतर आ गया है? अगर ये कहा जाए की लोगों के पास सिनेमाघर में जाकर फिल्म देखने के पैसे नही है तो यही दर्शक “पुष्पा”, “आरआरआर” और “केजीएफ” देखने के लिए पैसे कहां से ले आए? दूसरी बात ये की हिंदी फिल्मों का चुन–चुनकर बहिष्कार आखिर क्यों किया जा रहा है? इन प्रश्नों का उत्तर इतना आसान नहीं है।

असल में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री जिसे “बॉलीवुड” कहा जाता है, ने निर्लज्जता और अहंकार की सारी हदें पार कर दी है, जिसका गुस्सा अब जनता निकाल रही है। ये लोग जो खानदानी रईस है, हमेशा अंग्रेजी में बात करते है, इनका धरातल की परिस्थितियों से कोई लेना–देना नही होता है। ये लोग आत्ममुग्धता की अंतिम सीढ़ी पर बैठे हुए है। करीना ने कह दिया था की हमने आपको नही बोला है हमारी फिल्में देखने को, उसी तरह आलिया भट्ट ने भी कह दिया की अगर मैं नही पसंद तो मेरी फिल्में मत देखो। अर्जुन कपूर जैसे C ग्रेड कलाकार ने तो जनता को ही देख लेने की धमकी दे डाली।

वैसे तो हिंदी फिल्मों के पीटने के पीछे इनका हिंदू द्रोही होना, भारतीय संस्कृति की धज्जियां उड़ाता, अश्लीलता और वंशवाद जैसी वजहें तो है ही, इनके सुपरफ्लॉप होने का सबसे बड़ा कारण इन लोगों का अहंकार है। हमेशा अंग्रेजी में बतियाने वाले ये लोग हिंदी बोलने वालों को ही “नीचे” की श्रेणी का समझने लगे है। इनके बोलने पर इनका ये अहंकार झलककर बाहर आ ही जाता है। मतलब जनता के दम पर ये मुकाम हासिल करने के बाद इन्हे जनता ही “मूर्ख” लगने लगी है।

कुल मिलाकर मतलब ये है की अगर कोई गलती को स्वीकार करे तो उसे सुधारा भी जा सकता है। लेकिन अगर कोई हठधर्मिता और बेशर्मी पर उतर आए तो उसमें ब्रह्माजी भी सुधार नहीं ला सकते। यही हाल बॉलीवुड वाली गैंग का हो चुका है। ठीक है अगर ये ना सुधरना चाहें तो। बहिष्कार होने का अगला नंबर अब “ब्रह्मास्त्र”, “विक्रम वेधा” से होकर “पठान” और आगे भी लगातार जारी रह सकता है। और हां इस विरोध का आधार महजबी तो बिलकुल भी नहीं है। बहिष्कार गैंग ने अक्षय कुमार, तापसी और कंगना को भी वैसे ही आइना दिखाया है जैसे बाकियों को दिखाया जा रहा है।

बॉलीवुड वालों की हालत देखकर फिलहाल जनता को “तरस” नही बल्कि “आनंद” की ही अनुभूति हो रही है। न तो बॉलीवुडिया गैंग सम्हलने के मूड में बिलकुल भी दिखाई दे रही है और न ही जनता इन्हे “बख्शने” के मूड में है। इसलिए आने वाले दिनों में ये मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है। आप भी आंखे गड़ाए रखें और अपनी मौज में कमी न आने दें।

sachin pauranik

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