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हैरान कर देने वाली खबर !

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‘प्रसाद’, हिन्दू धर्म में इस शब्द के उच्चारण मात्र से मन में श्रद्धा का भाव उत्पन्न हो जाता है| सभी मंदिरों में कोई न कोई वस्तु प्रसाद के रूप में भक्तों को दी जाती है।  हम आपको ऐसे प्रसादों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे|

कालभैरव मंदिर, मध्य प्रदेश

उज्जैन के सेनापति के रूप में विद्यमान ‘कालभैरव’ को प्रसाद के रूप में ‘शराब’ का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद बचे हुए भाग को प्रसाद के तौर पर भक्तों में बांटा जाता है।

कामाख्या देवी मंदिर, असम

गुवाहाटी स्थित इस मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। मां के 51 शक्तिपीठों में से एक यह पीठ तंत्र साधना के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है। यहां प्रसाद के रूप में भक्तों को ‘गीला कपड़ा’ दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह कपड़ा माता के रज से गीला होता है।

बालासुब्रह्मण्यम मंदिर, केरल

बालामुरुगन भगवान को समर्पित इस मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में ‘चॉकलेट’ दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान के बाल स्वरूप को चॉकलेट अत्यंत प्रिय है।

चूहों वाली माता, बीकानेर

राजस्थान के बीकानेर से 30 किमी दूर ‘चूहों वाली माता का मंदिर’ यानि करणी देवी का मंदिर है। इस मंदिर में आने वाले भक्तों को चूहों का ‘जूठा प्रसाद’ मिलता है। फिर भी इसे खाने वाला कोई भक्त आज तक बीमार नहीं पड़ा है।

महादेव मंदिर, त्रिशूर

भारत में केरल ऐसा राज्य है, जहां साक्षरता की दर सबसे ज्यादा है। यहीं के एक मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में कोई फल, अनाज या मिष्ठान न देकर कुछ और ही दिया जाता है। जी हां, इस मंदिर में भक्तों को ‘सीडी, डीवीडी, किताबें आदि का वितरण प्रसाद के रूप में किया जाता है। यह मंदिर वडकुनाथन नाम से जाना जाता है|

जगन्नाथ मंदिर, ओडिशा

ओडिशा के पुरी स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में भगवान को 56 प्रकार के ‘व्यंजनों का भोग’ लगता है। बाद में यह प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित भी किया जाता है। इसी मंदिर में हर साल विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।

चाइनीज काली मंदिर, पश्चिम बंगाल

कोलकाता में बने इस मंदिर को चाइनीज कम्युनिटी ने बनवाया है। इस मंदिर में माता को प्रसाद के रूप में ‘नूडल्स’ का भोग लगाया जाता है, जो बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं।

अलागार मंदिर, तमिलनाडु

मदुरै में बने इस मंदिर में भगवान विष्णु के अलागार रूप को ‘डोसा’ चढ़ाकर उसका वितरण भक्तों में किया जाता है।

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