जब भारतीय टीम का सपना बना हकीकत

0

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 25 जून का दिन सबसे यादगार दिनों में से एक है| इसी दिन भारतीय टीम का सपना हकीकत में बदला था| 25 जून 1983 को भारतीय टीम ने विश्व कप जीतकर अपना नाम क्रिकेट इतिहास पन्नों पर दर्ज करवाया था| इस विश्व कप से पहले किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी कि यह टूर्नामेंट भारत जीतेगा|  70 के दशक में भारतीय टीम वन-डे क्रिकेट सबसे फिसड्डी टीमों में से एक थी| इस विश्व कप से पूर्व भारत की टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वन-डे सीरीज खेली थी, जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा था|

कुछ ऐसा था फाइनल का स्कोर कार्ड

इस मुकाबले में भारतीय टीम पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी थी| पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारतीय टीम 55वें ओवर में ही 183 रनों पर ढेर हो गई| भारत की ओर से श्रीकांत ने सर्वाधिक 38 रन बनाए थे| अपने पारी के दौरान वे काफी आक्रामक नजर आए| उन्होंने अपनी इस पारी में 7 चौके और एक छक्का लगाया| इस मुकाबले में मोहिंदर अमरनाथ ने एक छोर संभाला हुआ था| अमरनाथ ने 80 गेंदों में 26 रनों की पारी खेली थी|

वेस्टइंडीज के लिए 183 रनों के लक्ष्य को हासिल करना काफी आसान था, लेकिन भारतीय टीम की धारदार गेंदबाजी ने ऐसा नहीं होने दिया| भारतीय टीम की तरफ से मदन लाल और मोहिंदर अमरनाथ ने सर्वाधिक 3-3 विकेट लिए|

फाइनल के कुछ रोचक आंकड़े

  • फाइनल मैच में कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक नहीं लगा सका था|
  • फाइनल मैच में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट विवियन रिचर्ड्स का रहा था जिन्होंने 85 के स्ट्राइक रेट से 28 गेंदों में 33 रन बनाए थे|
  • वेस्टइंडीज की टीम के 7 बल्लेबाज फाइनल मैच में दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके थे|
  • 1983 वर्ल्ड कप फाइनल में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जोएल गार्नर ने 12 में से 4 ओवर मेडन फेंके थे, जबकि कपिल देव ने 11 में से 4 ओवरों में कोई रन नहीं दिया|

लॉर्ड्स में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम द्वारा जीत दर्ज करने के बाद मैदान में चारों तरफ़ भारतीय दर्शक पूरे जोश और जुनून के साथ तिरंगा लहराते नजर आए| उसी दिन के बाद से क्रिकेट का खेल भारतीयों के दिल में समा गया|

Share.