ये हैं फीफा के 5 सुपरस्टार

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इस समय फुटबॉल प्रेमियों पर फीफा विश्वकप का खुमार चढ़ा हुआ है| सभी अपनी पसंदीदा टीम का समर्थन कर रहे हैं| कुछ फुटबॉलप्रेमी रोनाल्डो और मेसी का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ नेमार का समर्थन कर रहे हैं| उम्मीद की जा रही थी कि इस बार विश्वकप में मेसी और रोनाल्डो कुछ नए रिकॉर्ड कायम करेंगे, लेकिन अब तक दोनों ही खिलाड़ियों ने कुछ ख़ास प्रदर्शन नहीं किया है| हालांकि रोनाल्डो ने इस विश्वकप में एक हैट्रिक जरूर लगाई है, लेकिन गोल्डन बूट की रेस में वे अभी भी पीछे हैं|

आज हम आपको फुटबॉल के कुछ ऐसे सितारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें भुलाना नामुमकिन है| इन खिलाड़ियों को मेसी और रोनाल्डो शायद कभी टक्कर नहीं दे पाएंगे| फुटबॉल विश्वकप की शुरुआत वर्ष 1930 से हुई थी, तब से लेकर आज तक कई सितारे निकले, जिन्होंने अपने दम पर अपने देश को जीत दिलाई| इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने विश्वकप में दमदार प्रदर्शन किया| हम बात कर रहे हैं ऐसे खिलाड़ियों की जो विश्वकप में सितारे साबित हुए|

पेले : ब्राजील के पेले के बारे में तो सभी जानते हैं| पेले विश्वकप में गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे| उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में विश्वकप में गोल दागा था| पेले दुनिया के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जो 3 बार विश्वकप विजेता टीम में शामिल रहे हैं| उनकी उपस्थिति में टीम ने 1958, 1962 और 1970 में विश्वकप का खिताब अपने नाम किया है| 1958 में उन्होंने फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में हैट्रिक लगाई थी| इसके बाद ब्राजील ने जीत दर्ज कर फाइनल में अपनी जगह बनाई थी|

गुइलेरमो स्टेबल : अर्जेंटीना के गुइलेरमो स्टेबल की कहानी काफी दिलचस्प है| वर्ष 1930 में खेले गए विश्वकप में उन्होंने 4 मैच खेले| इन चार मुकाबलों में उन्होंने 8 गोल दागे| विश्वकप के दौरान ही वार्नेल परोड़ा को हटाकर स्टेबल को कप्तान बनाया गया था, लेकिन 25 वर्षीय स्टेबल कॉलेज की परीक्षा की वजह से छुट्टी लेकर इस विश्वकप से चले गए थे|

दीदी : दीदी ब्राजील के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर में से एक थे| वर्ष 1958 विश्वकप में बड़ी मुश्किल से उन्हें 30 वर्ष की उम्र में खेलने का मौका मिला| उनके पास 40 गज की दूरी से शॉट मारने की क्षमता थी| दीदी को टीम में शामिल इसलिए नहीं किया जाता था क्योंकि उन्होंने गोरी लड़की से शादी की थी| बनाना किक उनका पसंदीदा शॉट था| वे स्पेन के रियल मेड्रिड से भी खेल चुके हैं|

जुआन एल्बर्टो : जुआन एल्बर्टो ने उरुग्वे की ओर से 1950  में विश्वकप खेला था| जुआन एल्बर्टो की खासियत उनकी फिनिशिंग और अनुभव था| उनके पास खेल की अच्छी दृष्टि के साथ ही अच्छे पास करने की क्षमता थी| 1946 से 1954 के बीच उन्होंने उरुग्वे के लिए 21 मैच में 8 गोल किए थे|

लुईस मोंटी : मोंटी दुनिया के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जो दो अलग-अलग देशों से विश्वकप का फाइनल खेले हैं| वे 1930 में अर्जेंटीना की ओर से खेले, लेकिन टीम फाइनल में उरुग्वे के हाथों हार गई थी| इसके बाद 1934 का विश्वकप वे इटली की तरफ से खेले| इस बार यह खिताब इटली ने अपने नाम किया था|

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