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विश्व कप फाइनल से पहले भारत के लिए खुशखबरी

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विश्व कप 2019 (ICC World Cup 2019) में भारतीय टीम जीत के रथ पर सवार है| टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है| पहला सेमीफाइनल भारत और न्यूजीलैंड (Ind vs NZ) के बीच खेला जाएगा| 14 जुलाई को विश्व कप 2019 का फाइनल मैच होगा| उम्मीद करते हैं कि भारतीय टीम फाइनल में अपनी जगह बनाए और जीत दर्ज कर विश्व कप घर लेकर आए| इससे पहले हिमा दास (Hima Das Won Second Gold Medal In Week) ने पोलैंड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में स्वर्ण पदक हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया है|

विश्व कप फाइनल से पहले भारत के लिए खुशखबरी

हिमा (Hima Das Won Second Gold Medal In Week) ने 23.97 सेकंड में यह दौड़ जीती| हिमा ने एक सप्ताह में दूसरी बार 200 मीटर दौड़ में पहला स्थान अपने नाम किया| उन्होंने 4 जुलाई को पोजनान एथलेटिक्स में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था| इसके अलावा पुरुषों में मोहम्मद अनस ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया| उन्होंने दौड़ को 21.18 सेकंड में पूरा किया| एमपी जुबीर ने 400 मीटर बाधा दौड़ में रजत और जितिन पाल ने कांस्य जीता| जुबीर ने 50.21 और जितिन ने 52.26 सेकंड का समय लिया| महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में भारत की पी सरिताबेन ने स्वर्ण, सोनिया बैस्या ने रजत और आर विद्या ने कांस्य पदक अपने नाम किया|

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पिछले साल भी जीता था स्वर्ण

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पिछले साल एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर हिमा दास रातोंरात पूरी दुनिया में छा गईं थीं| इस जीत के बाद उन्हें उड़नपरी कहा जाने लगा| हिमा दास काफी संघर्ष कर इस मुकाम पर पहुंची हैं| यह उड़न परी भी गरीबी के दलदल से ही निकली है| असम के एक छोटे से गांव से निकलकर एथेलेटिक्स चैंपियनशिप तक पहुंचने का सफर हिमा के लिए किसी कांटों से भरे पथ से कम नहीं था| हिमा का जन्म असम के नौगांव जिले के कांदुलिमारी गांव के किसान परिवार में हुआ था| उनके पिता रणजीतदास खेती कर अपने पांच बच्चों का पालन- पोषण करते थे| हिमा भी अपने पिता के साथ खेतों पर काम करती थीं| खाली समय में हिमा (Hima Das Won Second Gold Medal In Week) लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं|

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एक दिन युवा व खेल निदेशालय के कोच निपोन दास ने हिमा का खेल देखा, वे काफी प्रभावित हुए| इसके बाद उन्होंने हिमा को एथलीट बनने की सलाह दी और उनके परिवार वालों से भी बात की| उनके परिजन को कोच की बात तो समझ में आ गई और फिर हिमा दास ने जी जान से अपने खेल को खेलना कारी रखा|

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