1956 ओलम्पिक में भारत को गोल्ड दिलाने वाले नहीं रहे

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भारतीय हॉकी टीम के स्वर्णिम सफर के साथी रहे ओलंपियन हरदयाल सिंह अब नहीं रहे। हरदयाल सिंह ने 1956 में हुए मेलबर्न ओलम्पिक में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। 95 साल के हरदयाल सिंह का शुक्रवार को देहरादून में निधन हो गया।अमेरिका के खिला जिस मैच में भारत 16-0 से विजयी रहा था उसी मैच में पांच गोल दागने वाले हरदयाल सिंह ही थे।  हरदयाल सिंह वर्ष 1972 से 1987 तक भारतीय हॉकी टीम के कोच भी रहे।

हरदयाल सिंह के पौत्र अमन सिंह ने बताया कि वह लंबे समय से बीमार थे और बीते डेढ़ माह से उनकी स्थिति गंभीर थी। हॉकी स्टिक को अपनी अंगुलियों के इशारे पर नचाने वाले हरदयाल सिंह ने शुक्रवार को दोपहर बाद बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। बीस साल सेना में सेवा करने करने के बाद हरदयाल सूबेदार से पद से 1969 में सेवानिवृत्त हुए। भारत सरकार ने साल 2004 में हरदयाल सिंह को ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया था। बताया जाता है की हॉकी को अपना पहला प्यार बताने वाले हरदयाल हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद के भी बेहद करीब थे।  परिवार को गर्व है कि हरदयाल सिंह ने अपने पीछे एक गौरवमयी इतिहास छोड़ा है।

बता दे 1928 में भारतीय हॉकी टीम अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ की पहली गैर यूरोपीय सदस्य टीम बनी।1928 में, टीम ने अपना पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता और 1956 तक ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम नाबाद रही, लगातार छह स्वर्ण पदक जीते।भारत ने ओलिंपिक में कुल ११ पदक जीते हैं।

भारतीय हॉकी टीम ने अब तक आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते है, जो सभी राष्ट्रीय टीमों से अधिक है।जिनमे ८ स्वर्ण के अलावा एक रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं।

वर्तमान में हरेन्द्र सिंह भारतीय पुरूष हॉकी टीम के कोच हैं। इसके पहले ऑस्ट्रेलिया के हॉकी टीम के टेरी वॉल्श कोच नियुक्त थे।

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