मुरलीधरन के सामने बल्लेबाज भी कांपते थे…

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विश्व के सर्वकालीन महानतम गेंदबाज श्रीलंका टीम के पूर्व ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने आज ही के दिन 28 अगस्त 1992 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में 27 साल पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था| उस वक्त किसी ने ये नहीं सोचा था कि 20 साल का ये स्पिन गेंदबाज़ इतना बड़ा कीर्तिमान रच देगा| उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट में पदार्पण 18 जुलाई 1993 को भारत के खिलाफ किया था।  मुथैया मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan First Test Match Anniversary) की गेंदबाज़ी का सामना करने में उस समय के शानदार बल्लेबाज़ भी कतराते थे| उनके रहते विरोधी टीम में हमेशा खौफ का माहौल रहता था

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मुरलीधरन अंतरराष्ट्रीय टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं| इन्होने 341 एकदिवसीय मैचों में 23.18 की औसत से 519 विकेट लिए हैं| मुरलीधरन ने 131 टेस्ट मैचों में 22.18 की औसत से 800 विकेट लिए हैं|

छह विकेट प्रति टेस्ट के औसत से मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan First Test Match Anniversary) इस खेल में सबसे सफल गेंदबाजों में से एक रहे हैं| मुरलीधरन लगातार 1,711 दिनों की एक रिकार्ड अवधि में 214 टेस्ट मैचों के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की खिलाड़ियों की रैंकिंग की टेस्ट गेंदबाज श्रेणी में पहले स्थान पर बने रहे|

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मुरलीधन (Muttiah Muralitharan First Test Match Anniversary) का शुरुआती समय कुछ खास नहीं रहा था| उन पर संदिग्ध एक्शन का भी आरोप लगा| यहां तक की 1995 में मेलबार्न टेस्ट में तो अंपायरों ने उनकी सात गेंदों को नो बॉल दे दिया ‌था| इस पर श्रीलंकाई कप्तान अर्जुन रणतुंगा नाराज हो गए थे और मैच तक छोड़ने की धमकी दे डाली| इसके बाद आईसीसी ने उनके गेंदबाज़ी एक्शन को हरी झंडी दी और फिर यही वह पल था, जब मुरलीधरन एक घातक गेंदबाज बनते चले गए|

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उन्होंने 22 जुलाई 2010 में अपने अंतिम टेस्ट मैच की अपनी अंतिम गेंद पर अपना 800वां विकेट लिया| इसके बाद उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिए|

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