कहीं और नहीं दिल में हैं ईश्वर

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7 साल के बच्चे ने एक बार मां से पूछा, ”मां, क्या हम भगवान से मिल सकते हैं?”

”हां बेटा, जिस दिन तुम सच्चे मन से ईश्वर की खोज करोगे, उस दिन वे तुमसे मिलने ज़रूर आएंगे|” कहते हुए मां ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा|

बच्चे के दिमाग में यह बात बैठ गई| वह रोज इसी बारे में सोचने लगा| एक दिन उसने बिना सोचा कि आज वह ईश्वर के साथ बैठकर खाना खाएगा|उसने चार रोटियां बांधीं और घर में बिना कुछ बताए वह एक ओर चल पड़ा|

चलते-चलते बच्चा बहुत दूर निकल गया| सुबह से शाम हो गई| थकान और भूख के कारण उसका बुरा हाल हो गया| तभी उसे कुछ दूरी पर एक तालाब नज़र आया| उसके एक किनारे पर कोई महिला बैठी हुई थी|

बच्चे ने महिला की ओर देखा| उसकी उम्र 70-80 साल रही होगी, लेकिन इसके बावजूद उनकी आंखों में गज़ब की चमक थी| वह महिला भी उसे देखकर मुस्कराई और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा| बच्चे को लगा जैसे वह इस सुनसान जंगल में उसी का इंतज़ार कर रही थी|

बच्चा वहीं पर बैठ गया| तभी उसे अपनी भूख का एहसास हुआ|उसने थैले से रोटी निकाली और खाने लगा, लेकिन अगले ही पल उसे अपनी गलती का एहसास हुआ| उसने एक रोटी बुजुर्ग महिला की ओर बढ़ाई और मुस्कराकर बोला, ”माई, रोटी खाओगी?”

यह देखकर म‍हिला के झुर्रियों वाले चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी आ गई आैर आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे| यह देखकर बच्चा बोला, ”तुम क्यों रो रही हो माई? क्या तुम्हारा कोई सामान खो गया है?”

”नहीं बेटा, ये तो खुशी के आंसू हैं|” महिला ने बच्चे के सिर पर हाथ फेरा, ”आज मेरी हर इच्छा पूरी हो गई|”

यह सुनकर बच्चा मुस्करा दिया| उसने अपने हाथ से रोटी तोड़कर बुजुर्ग महिला को ख‍िलाई| यह देखकर फिर से महिला की आंखों से आंसुओं की धार बह चली| उसने भी अपने हाथ से बच्चे को रोटी ख‍िलाई और उसे दुलार किया|

रोटी खाने के बाद बच्चे को अपनी मां की याद आई| उसे लगा कि घर पर मां परेशान हो रही होंगी इसलिए उसने उस बुजुर्ग महिला से इजाज़त ली और अपने घर लौट गया|

बच्चा जब अपने घर पहुंचा तो मां दरवाजे पर ही मिल गई| उसने बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया और उसे जोर-जोर से चूमने लगी| यह देखकर बच्चा बोला, ”मां, आज मैं भगवान से मिला, मैंने उनके साथ बैठ कर रोटी खाई, मैं बहुत खुश हूं मां|”

उधर, वह बुजुर्ग महिला जब अपने घर पहुंची तो उनकी खुशी देखकर घर वाले हैरान रह गए| उनके पूछने पर वे बोलीं, ”मैं 2 दिन से तालाब के किनारे अकेली भूखी बैठी थी| मुझे विश्वास था कि भगवान आएंगे और मुझे अपने हाथों से खाना खिलाएंगे| आज सचमुच भगवान ने मुझे दर्शन दिए और अपने हाथों से रोटी खि‍लाई|”

इस कहानी में उस बच्चे और बुजुर्ग महिला दोनों को ईश्वर की तलाश थी| ईश्वर कहीं नहीं था, उनके दिलों में था इसलिए उन्होंने उसका रूप किसी दूसरे व्यक्ति में खोज लिया, जो स्वयं ईश्वर की तलाश में निकला था| ईश्वर किसी मंदिर में नहीं बल्कि आपके दिल में रहता है| ईश्वर को ढूंढने के लिए उसे महसूस करने की जरूरत है| वो हर शख्स में बसता है, यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे देख पाते हैं या नहीं|

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