हर स्थिति में सकारात्मक रहना चाहिए

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एक बार एक बड़ी कंपनी में एक राम नाम का कर्मचारी था। वह बड़ा मेहनती था। हर काम समय से और अच्छे से करता था। उस कंपनी के मालिक को भी राम पर बड़ा गर्व था। एक दिन राम काम पर नहीं आया। कंपनी के मालिक को लगा कि शायद उसे इस कंपनी में अपने काम के बराबर पैसे नहीं मिल रहे हैं इसलिए वह कोई और नौकरी ढूंढ़ने गया है। अगले दिन जब राम ऑफिस आया, तब मालिक ने उसके वेतन को 10 % बढ़ाकर दिया। राम ने चुपचाप उसे स्वीकार किया और घर चला गया। कुछ महीनों बाद राम दोबारा ऑफिस नहीं आया, लेकिन इस बार मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया। उन्होंने सोचा कि पिछली बार इसे मैंने बढ़ाकर वेतन दिया, फिर भी उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अगले दिन जब राम ऑफिस आया, तब उसके मालिक ने उसके वेतन से 10 % की कटौती कर दी। राम ने इस बार भी बिना कुछ प्रतिक्रिया दिए उसे स्वीकार कर लिया।

अब मालिक से रहा नहीं गया। उन्होंने राम को बुलाया और उससे पूछा कि जब मैंने तुम्हें वेतन बढ़ाकर दिया, तब भी तुमने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और जब मैंने वेतन घटाकर दिया, तब भी तुमने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसका कारण क्या है ? तब राम ने कहा कि जब मैंने पहली बार ऑफिस से छुट्टी ली थी, उस समय मेरी बेटी का जन्म हुआ था। जब आपने मुझे वेतन बढ़ाकर दिया, तब मुझे लगा कि वह मेरी बेटी के लिए है। जब मैंने दूसरी बार ऑफिस की छुट्टी की थी, तब मेरी मां का देहांत हुआ था। इसके बाद आपने मेरा वेतन घटाकर दिया था तो मैंने सोचा कि अब मेरी मां नहीं है इसलिए आपने मेरा वेतन घटाया है।

यह सुनकर मालिक को राम पर काफी गर्व हुआ कि किस तरह वह हर स्थिति में सकारात्मक रहता है। उन्होंने तुरंत राम से माफ़ी मांगी और उसका पूरा वेतन उसे दे दिया। इसी तरह हमें भी हर स्थिति में सकारात्मक रहना चाहिए और अपने अच्छे और बुरे समय को खुशी से स्वीकार करना चाहिए।

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