हमारे 4 घोड़े

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एक राजा के पास 4 घोड़े थे। वे चारों बड़े ही जंगली थे। बड़ी कोशिशों के बाद भी उन्हें कोई भी काबू नहीं कर पा रहा था। आखिर में राजा ने उन घोड़ों से परेशान होकर घोषणा की कि जो भी इन घोड़ों को काबू करेगा, उसे वे 1000 सोने की मोहरे देंगे। कई लोग इस लालच में घोड़ों को काबू करने पहुंचे, लेकिन काफी कोशिश के बाद भी वे उनसे काबू में नहीं आए।

कुछ दिनों बाद एक आदमी वहां आया और उसने कहा कि वह उन घोड़ों को काबू में कर सकता है। राजा ने उससे कहा कि अभी तक कई लोग आ चुके हैं और यह कोशिश कर चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उस व्यक्ति ने राजा से कहा कि मैं इन्हें काबू में कर सकता हूं, लेकिन मेरी एक शर्त है। जब तक मैं इनको प्रशिक्षित करूंगा, तब तक ये मेरे साथ रहेंगे। राजा ने बात मान ली।

इस बात को एक साल बीत गया, फिर भी वह व्यक्ति घोड़ों को लेकर वापस नहीं आया। राजा को लगा कि शायद घोड़े उस व्यक्ति के पास से भाग गए हैं। राजा ने उन घोड़ों के वापस आने की उम्मीद छोड़ दी। कुछ दिनों बाद उसने देखा कि वह व्यक्ति घोड़ों को लेकर वापस आ रहा है और घोड़े बड़े अच्छे से कतारबद्ध उसके पीछे-पीछे चल रहे हैं। राजा को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने व्यक्ति से पूछा कि तुमने यह कैसे किया? व्यक्ति ने बताया कि घोड़े वाकई में बहुत जंगली थे। उन्हें काबू में करने के लिए मुझे टाइम चाहिए था। शुरू के कुछ दिन मैं उनके साथ ही रहता था। वे दौड़ते थे तो मैं भी दौड़ता था ,वे खाना खाते थे तो मैं भी खाना खाता था, वे सोते थे तो मैं भी सोता था। ऐसा करते-करते घोड़ों को लगने लगा कि उन चारों घोड़ों के साथ मैं भी पांचवा घोड़ा हूं। फिर धीरे-धीरे मैंने उन पर सीट लगाई, लेकिन उन्होंने ग़ुस्से में सीट निकाल दी, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें सीट की आदत हो गई। फिर मैंने उन्हें बेल्ट लगाया, फिर उन्होंने उस बेल्ट को ग़ुस्से में निकाल दिया, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें बेल्ट की भी आदत हो गई। ऐसा करते-करते मैंने चारों घोड़ों को काबू कर लिया, लेकिन बाकी लोग पहले दिन से ही घोड़ों को बिना जाने उन्हें काबू करना चाहते थे।

इसी तरह हमारे मन में भी 4 घोड़े होते हैं। मानस, बुद्धि ,चिंता और अहंकार। बाकी लोगों की तरह हम लोग भी एक मिनट में खुद के मास्टर बनना चाहते हैं, बिना इन पर कुछ काम किए। यही वजह है कि जल्द ही हम लोग अपने आप पर अपना काबू खो देते हैं इसलिए ज़रूरी है कि सबसे पहले हम हमारे मन से दोस्ती करें। जब तक हम अपने मन से दोस्ती नहीं करेंगे, तब तक मन हमारी बात नहीं सुनेगा। यही कारण है कि कुछ लोग योग, प्राणायाम और अध्यात्म के बावजूद अपने मन पर काबू नहीं पा पाते क्योंकि उनका अहंकार उन्हें उनके मन से दोस्ती नहीं करने देता। इसलिए सबसे पहले हमें इन चारों घोड़ों से दोस्ती करना होगी, तभी हम अपने मन के साथ खुश रह पाएंगे।

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