छोटे-बड़े ख़ुशी के पलों को खुलकर जिओ

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एक बार एक व्यक्ति एक संत के पास अपनी परेशानी लेकर जाता है। वह उनसे कहता है कि मेरी ज़िन्दगी में कोई ख़ुशी ही नहीं है। मैंने कई बार अपनी ख़ुशी के लिए इंतज़ार किया, लेकिन मुझे वह मिली ही नहीं। मैंने सोचा था कि जब मेरी नौकरी लग जाएगी, तब मैं आपने पिताजी को एक कार तोहफे में दूंगा, लेकिन मेरी नौकरी लगने से पहले ही मेरे पिताजी का देहांत हो गया। मैंने सोचा था कि जब मेरा प्रमोशन होगा, तब मैं मेरे बच्चों और बीवी को घुमाने ले जाऊंगा, लेकिन मेरा प्रमोशन ही नहीं हुआ। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मेरी ज़िन्दगी में ख़ुशी कब आएगी।

व्यक्ति की पूरी बात सुनकर संत उसे अपने साथ एक बाग़ में लेकर गए। उस बाग़ में कई सारे गुलाब के फूल थे। संत ने व्यक्ति से कहा कि तुम इस पूरे बाग़ का एक बार चक्कर लगाओ और इस बाग़ का सबसे सुंदर फूल तोड़कर लाओ। शर्त यह है कि एक फूल से आगे बढ़ने के बाद तुम दोबारा उसके पास नहीं जा सकते। व्यक्ति सुंदर फूल की तलाश में निकल पड़ता है। रास्ते में उसे कई बड़े, खिले हुए और सुंदर फूल मिलते हैं, लेकिन वह यह सोचकर आगे बढ़ जाता है कि शायद उसे आगे और अच्छे और सुंदर फूल मिल सकते हैं। ऐसा सोचते-सोचते वह बाग़ के अंत तक पहुंच जाता है। अंत में उसे केवल मुरझाए फूल ही मिलते हैं। अब वह वापस उन खिले फूलों पर वापस नहीं जा सकता था इसलिए उसने उन्हीं मुरझाए फूलों में से एक थोड़ा खिला हुआ फूल तोड़कर संत को दिखाया।

तब संत ने कहा कि यह बाग़ तुम्हारी ज़िन्दगी की तरह है। तुम्हारी ज़िन्दगी में बड़े और खिले फूलों की तरह कई ख़ुशी के पल आए थे, लेकिन तुमने उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया यह सोचकर कि आगे और ख़ुशी के पल आएंगे, लेकिन ऐसा करते-करते तुमने तुम्हारी ज़िन्दगी के कई ख़ुशी के पल खो दिए। ऐसे में तो तुम्हारी ज़िंदगी खत्म हो जाएगी और केवल मुरझाए फूल ही रह जाएंगे इसलिए ख़ुशी का इंतज़ार मत करो। अपनी ज़िन्दगी में आए छोटे-बड़े ख़ुशी के पलों को खुलकर जिओ, तभी आप खुश रह पाओगे।

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