नकली हार ने बनाया जौहरी

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बिना ज्ञान के दुनिया में कोई भी सफल काम संभव नहीं है| ज्ञान व्यक्ति के लिए नए द्वार खोलता है, जो उसे नई ऊंचाइयों पर लेकर जाती है| किसी ने सही कहा है कि ज्ञान प्राप्त होने के बाद ही सच और झूठ का फर्क पता चलता है|ज्ञान के बिना इस संसार में हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं, सब गलत है| ऐसे ही गलतफहमी का शिकार होकर रिश्ते बिगड़ते हैं| पढ़ें यह कहानी|

एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया| खाने के भी लाले पड़ गए| एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा- “बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ| कहना इसे बेचकर कुछ रुपए दे दे|

बेटा वह हार लेकर चाचाजी के पास गया| चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख परखकर कहा- बेटा, मां से कहना कि अभी बाज़ार बहुत मंदा है| थोड़ा रुककर बेचना, अच्छे दाम मिलेंगे|

साथ ही चाचा ने उसे थोड़े से रुपए देकर कहा कि तुम कल से दुकान पर आकर बैठना| अगले दिन से लड़का रोज दुकान पर जाने लगा और वहां हीरों व रत्नों की परख का काम सीखने लगा|  एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया| लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख करवाने आने लगे|

एक दिन उसके चाचा ने कहा, “बेटा अपनी मां से वह हार लेकर आना और कहना कि अब बाज़ार बहुत तेज है, उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे|

मां से हार लेकर उसने परखा तो पाया कि वह तो नकली है| वह हार घर पर ही छोड़कर दुकान लौट आया| चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए? उसने कहा, वह तो नकली था|

तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार हार लेकर आए थे, तब मैं उसे नकली बता देता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा हमारी चीज को भी नकली बताने लगे| आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो पता चल गया कि हार सचमुच नकली है|

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