Jeevan Mantra : तो जीवन में दुःख नहीं आएगा

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सुखी जीवन जीने के लिए मनुष्य को कुछ जीवन मंत्रों को अपनाने की आवश्यकता होती हैं | आचरण एवं कर्मठता से सुखमय जीवन जिया जा सकता हैं| कुछ जीवन मंत्र हमारे शास्त्रों से लिए गए हैं, जिनके द्वारा आप जीवन को सुखमय बना सकते हैं | एक बार युधिष्ठिर ने इसी तरह का प्रश्न भीष्म पितामह से पूछा कि भाग्य के सहारे जीना चाहिए या पुरुषार्थ के सहारे| इस पर पितामह भीष्म ने कहा कि धर्म अपनाने एवं उसके अनुसार जीवन-पथ पर चलने से व्यक्ति की सोच एवं दृष्टि सुस्पष्ट होती है| वह सदैव सत आचरण करता है, जिससे उसके जीवन में नकारात्मकता नहीं आती, जबकि भाग्य के सहारे जीने वाला पहले आलसी होता है और उसके बाद नकारात्मक हो जाता है, जिससे उसके इर्द-गिर्द तनाव डेरा डाल देता है| फिर उसकी इस कमजोरी का दूसरे लोग भी फायदा उठाने लगते हैं|

जीवन मंत्र जिन्हें हमेशा ध्यान रखें –

* यह सत्य है कि बिना बीज के जैसे वृक्ष नहीं होता, बिना कर्मबीज के परिणाम का फल नहीं मिलता |
* धर्मग्रंथों में धर्म की जो परिभाषा है वह भगवान के प्रकट होकर आपका साथ देने की बात कभी नहीं कहते |
* ऐसा ही सोचकर कर्म करने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना मूर्खता ही है |
* धर्मग्रंथों के बताए रास्ते पर सूझ-बूझ के साथ चलने पर आत्मबल मजबूत होता है| कर्म से बढ़ा कोई नहीं है |
* महाभारत के अनुशासन पर्व में इस बात का उल्लेख है|
* खूब दान करने से भगवान नहीं मिलते |
* महात्माओं ने मां लक्ष्मी की प्रसन्नता से जिस धन-दौलत मिलने की बात कही है वह अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठा से लगे रहना ही बताया है|
* लक्ष्मी का दुरुपयोग भी सख्त मना किया गया है|
* कुपात्र को दान आदि देने से दोष भी बताया गया है|
* अपने पुरुषार्थ पर ही भरोसा करना सबसे श्रेष्ठ है

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