अपने कर्मों का फल मिलना तय है…

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एक आदमी का पूरा परिवार गुरुद्वारे जाकर गुरु की सेवा किया करता था। उस परिवार में एक लड़का, जो दोनों पैरों से अपाहिज था, वह भी वहां बैठे-बैठे बहुत सेवा किया करता था। सेवा करते-करते बरसों बीत गए| उसका परिवार यह सोचता था कि हम सब गुरुद्वारे जाकर रोज इतनी सेवा करते हैं, फिर हमारे परिवार में यह बच्चा ऐसा क्यों हुआ, इसका क्या दोष था।

एक बार गुरुपूर्णिमा के दिन सत्संग चल रहा था। हजारों लाखों श्रद्धालुओं के बीच उस अपाहिज पुत्र के पिता ने गद्दी पर बैठे हुए गुरु से एक सवाल किया कि हे गुरुदेव ! हम सब गुरुद्वारे में इतनी सेवा करते हैं, कभी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचते हैं, न ही किसी का बुरा करते हैं, फिर ऐसा क्या गुनाह हुआ जो हमारा बच्चा अपाहिज पैदा हुआ? 

गुरु ने जवाब दिया, वैसे तो हम यह बात बता नहीं सकते थे, पर इस समय तूने हजारों लाखों संगत के बीच में यह सवाल पूछा है| अब अगर मैंने तेरी बात का उत्तर नहीं दिया तो हजारों-लाखों संगत का विश्वास डावांडोल हो जाएगा। इसलिए पूछता है तो सुन। यह जो बच्चा है, जो दोनों टांगों से बेकार है, पिछले जन्म में यह एक किसान का बेटा था। रोज खेत में अपने पिता को दोपहर में भोजन का टिफिन खेत में देने जाया करता था।

एक दिन इसकी मां ने इसे दोपहर में खाना लगाकर दिया और कहा कि बेटा खाना खाकर पिताजी को टिफिन दे आ। इसकी मां ने खाना परोसकर थाली में रखा| इतने में इसके किसी दोस्त ने आवाज लगाई तो यह खाना वहीं छोड़कर अपने दोस्त से बात करने बाहर चला गया। इतने में एक कुत्ता घर में घुस आया और उसने थाली में मुंह डाला और रोटी खाने लगा। लड़का घर वापिस आया तो उसने कुत्ते को थाली में मुंह डालता देखा| पास ही में एक लोहे का बड़ा सा डंडा पड़ा था| इसने यह भी नहीं सोचा कि खाना तो जूठा हो चुका है| बिना सोचे समझे उस कुत्ते की दोनों टांगों पर इसने इतनी जोर से लोहे का डंडा मारा कि वह कुत्ता दोनों पैरों से बेकार हो गया| वह जिंदगीभर घसीटते-घसीटते जिया और तड़प-तड़प कर मर गया। यह उसी कुत्ते की बद्दुआ का फल है, जो इस जन्म में यह दोनों टांगों से अपाहिज पैदा हुआ है।

पुत्र, इस संसार में इन्सान को अपने-अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है| इस जन्म में यदि आपने किसी की टांग तोड़ी है तो स्वाभाविक है कि अगले जन्म में आपकी टांग टूटना है, इसलिए जो भी कर्म करो सोच-समझकर करो और अच्छे कर्म करो| कभी किसी का दिल मत दुखाओ, हमेशा सत्कर्म करो|

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