website counter widget

Guru Nanak Jayanti 2019 : प्रकाश पर्व गुरुनानक देव की 550 वी जयंती

0

आज गुरुनानक देव की 550 वी जयंती (Guru Nanak Jayanti 2019) है सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव जी का जन्म प्रकाश पर्व के रूप में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी के जन्म के अवसर पर गुरुद्वारों पर कई तरह के धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। दूसरे धर्मों के लोग भी प्रकाश पर्व को हर्षोल्लास और धूमधम से मनाते हैं। गुरुनानक देव जी पंजाब के तलवंडी नामक स्थान में 15 अप्रैल, 1469 को एक किसान के घर अवतरित हुए थे। यह स्थान लाहौर से 30 मील पश्चिम में स्थित है। अब यह ‘नानकाना सहब’ के नाम से जाना जाता है। तलवंडी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया।

जीवन मंत्र : सफलता के लिए जरूरी है आत्मविश्वास

नानक देव जी (Guru Nanak Jayanti 2019) के पिता का नाम कालू एवं माता का नाम तृप्ता था। उनके पिता खत्री जाति एवं बेदी वंश के थे। वे कृषि और साधारण व्यापार करते थे और गाँव के पटवारी भी थे। गुरु नानक देव जी की पत्नी का नाम सुल्लखणी था, वह बटाला की रहने वाली थीं। उनके दो बेटे थे, एक बेटे का नाम श्रीचंद और दूसरे बेटे का नाम लख्मीदास था। गुरु नानक देव की बाल्यावस्था गाँव में व्यतीत हुई। बाल्यावस्था से ही उनमें असाधारणता और विचित्रता थी। उनके साथी जब खेल-कूद में अपना समय व्यतीत करते तो वे नेत्र बन्द कर आत्म-चिन्तन में निमग्न हो जाते थे। इनकी इस प्रवृत्ति से उनके पिता कालू चिन्तित रहते थे। मात्र 5 साल की उम्र में गुरु नानक देव जी ने अपना पहला संदेश दिया था।

गुरुनानक देव जी सात वर्ष की आयु में पढ़ने के लिए गोपाल अध्यापक के पास भेजे गये। एक दिन जब वे पढ़ाई से विरक्त हो, अन्तर्मुख होकर आत्म-चिन्तन में निमग्न थे, अध्यापक ने पूछा- पढ़ क्यों नहीं रहे हो? गुरु नानक का उत्तर था- मैं सारी विद्याएँ और वेद-शास्त्र जानता हूँ। गुरु नानक देव (Guru Nanak Jayanti 2019) ने कहा- मुझे तो सांसारिक पढ़ाई की अपेक्षा परमात्मा की पढ़ाई अधिक आनन्दायिनी प्रतीत होती है, गुरु नानक देव जी ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में लगा दिया। उन्होंने सिर्फ भरत में ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और अरब देशों में भी जाकर लोगों को पाखंडवाद से दूर रहने की शिक्षा दी। गुरु जी के जन्मदिवस को गुरु पर्व या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

एक बार उनके पिता जी ने उनको 20 रुपये देकर बाजार भेजा और बोले कि सच्चा सौदा लेकर आना। उन्होंने उन रुपयों से भूखे साधुओं को भोजन करा दिया। लौटकर उन्होंने पिता जी से कह कि वे खरा सौदा कर आए हैं। नानक देव जी ने समाज को जागरूक करने के लिए चार उदासियां (यात्राएं) कींं। उन्होंने हरिद्वार, अयोध्या, प्रयाग, काशी, गया, पटना, असम, बीकानेर, पुष्कर तीर्थ, दिल्ली, पानीपत, कुरुक्षेत्र, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर, सोमनाथ, द्वारका, नर्मदातट, मुल्तान, लाहौर आदि स्थानों का भ्रमण किया। गुरु नानक देव जी की मृत्यु सन् 1539 ई. में हुई। इन्होंने गुरुगद्दी का भार गुरु अंगददेव (बाबा लहना) को सौंप दिया और स्वयं करतारपुर में ‘ज्योति’ में लीन हो गए।

Jeevan Mantra : सफलता प्राप्त करने के 10 अचूक मंत्र

-गुरुनानक देव जी के प्रमुख सिद्धांत-

1. ईश्वर एक है।

2. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।

3. जगत का कर्ता सब जगह और सब प्राणी मात्र में मौजूद है।

4. सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता।

5. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं।

6. ईमानदारी से मेहनत करके उदरपूर्ति करना चाहिए।

7. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं।

8. सदा प्रसन्न रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने को क्षमाशीलता मांगना चाहिए।

9. भोजन शरीर को जिंदा रखने के लिए जरूरी है पर लोभ-लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है।

10. मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से जरूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए।

सम्राट अशोक के अनमोल Quote

-Mradul tripathi

ट्रेंडिंग न्यूज़
[yottie id="3"]
Share.