जीवन की समस्याओं से मत घबराओ

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एक बार एक शिल्पकार अपने काम से दूसरे शहर जा रहा था।चलते-चलते वह काफी थक गया तो थोड़ी देर आराम करने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया।वह अपने घर से खाना भी लेकर आया था। थोड़ी देर आराम करने के बाद शिल्पकार ने वहां खाना खा लिया और थोड़ी देर वहीं रुकने का मन बना लिया। वहां बैठे-बैठे अचानक उसकी नज़र उसके सामने रखे दो पत्थरों पर पड़ी। एक काले रंग का था और दूसरा गेरुए रंग का। शिल्पकार को गेरुए रंग का पत्थर काफी पसंद आया। उसने अपने औजार निकाले और जैसे ही उस पत्थर को आकार देने के लिए उस पर पहला वार किया वह पत्थर ज़ोर से चिल्लाया, “नहीं ! मुझे मत मारो।” शिल्पकार ने उससे कहा कि मैं तुम्हें एक अच्छा आकार दे रहा हूं, लेकिन वह पत्थर बोला कि मैं अपने इसी आकार में खुश हूं।

पत्थर की इस बात से शिल्पकार को काफी ग़ुस्सा आया। उसने गेरुए रंग के पत्थर को छोड़ काले पत्थर को आकार देना शुरू किया। काला पत्थर चुपचाप सारे वार सहता रहा। कुछ देर बाद शिल्पकार ने उसे एक सुंदर देवी की मूर्ति का आकार दे दिया। वह उस मूर्ति को वहीं छोड़कर आगे की यात्रा पर निकल गया। शिल्पकार को लौटने में 3 साल लग गए। बहुत सारा धन कमाकर जब वह वापस उसी जंगल से गुज़र रहा था, तब वह उसी पेड़ के पास पहुंचा। उसने देखा कि जहां उसने उस मूर्ति को छोड़ा था, वहां एक बहुत सुंदर मंदिर बन चुका है और मूर्ति के दर्शन के लिए लोग लंबी कतार में लगे हैं।

शिल्पकार अपनी बनाई मूर्ति को देखना चाहता था इसलिए वह भी कतार में लग गया। जब उसकी बारी आई तब उसने देखा कि उस मूर्ति को बड़े ही सुंदर सोने के आभूषणों से सजाया गया था। मूर्ति देखकर शिल्पकार बड़ा खुश हुआ और दर्शन करके बाहर आया, तभी उसने देखा कि वह गेरुए रंग का पत्थर भी वहीं था, लेकिन लोग अब उस पर नारियल फोड़कर मूर्ति पर चढ़ा रहे थे।

इसी तरह हमारे गुरु भी एक शिल्पकार की तरह ही होते हैं। हमें सही आकार देने के लिए वे भी हम पर घाव करते हैं। जिसने उन घावों को बिना डरे सह लिया, उसे आगे जाकर बड़ी प्रसिद्धि प्राप्त होती है और जो भी उस घाव से डर कर भाग गया, उसे जीवनभर घाव सहने पड़ते हैं।

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