क्या मैं यह कर पाउंगा ?

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एक गांव में रोहन और मोहन नाम के दो भाई रहते थे। रोहन की उम्र 6 वर्ष थी और मोहन की उम्र 10 वर्ष थी। दोनों भाई रोज़ जंगल में सैर करने जाते थे। एक दिन सैर करते-करते मोहन अचानक कुएं में गिर जाता है और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगता है। मोहन और रोहन दोनों को तैरना नहीं आता था। मोहन चिल्लाकर रोहन से उसे बचाने के लिए कहता है। रोहन आसपास देखता है, लेकिन उसे दूर-दूर तक कोई भी नहीं दिखाई देता है, जिसे बुलाकर वह अपने भाई की जान बचा सके।

अपने भाई को डूबता देख रोहन कुएं में बाल्टी डालता है और मोहन को उसे पकड़ने के लिए कहता है। अपना पूरा ज़ोर लगाकर वह मोहन को कुएं के बाहर निकाल लेता है। बाहर निकलने के बाद दोनों को वापस अपने गांव जाने में डर लगता है। उन्हें लगता है कि सब उन्हें डांटेंगे कि जंगल में अकेले क्यों गए, लेकिन इसके विपरीत जब वे यह बात गांव वालों को बताते हैं तो कोई उनकी बात का विश्वास नहीं करता। किसी को भी इस बात पर विश्वास नहीं होता कि 6 साल का बच्चा, जो एक बाल्टी नहीं उठा सकता है, वह कैसे 10 साल के बच्चे को कुएं से बाहर निकाल सकता है।

जब उनकी बात पर कोई यकीन नहीं करता तब वे दोनों बच्चें रहीम चाचा के घर जाते हैं। रहीम चाचा गांव के वरिष्ठ व्यक्तिओं में से एक थे। सभी लोग उनका काफी आदर करते थे। बच्चे रहीम चाचा को पूरी बात बतातें हैं और वे झट से उनकी बात पर विश्वास कर लेते हैं। बच्चों को आश्चर्य होता है कि पूरे गांव ने उनकी बात नहीं मानी पर रहीम चाचा ने एक बार में उनकी बात मान ली। वे उनसे इसका कारण पूछते हैं। तब रहीम चाचा कहते हैं कि सवाल यह नहीं है कि तुम यह कैसे कर पाए, सवाल यह है कि तुम यह क्यों कर पाए? जिस वक्त मोहन कुएं में गिरा, उस समय वहां दूर-दूर तक रोहन को यह बताने वाला कोई नहीं था कि तू यह नहीं कर सकता, वह खुद भी नहीं इसलिए रोहन अपने बड़े भाई को कुएं से बाहर निकाल पाया।

हम सभी के अंदर एक विशेष तरह की शक्ति होती है, लेकिन हम उस शक्ति का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए नहीं कर पाते हैं क्योंकि हमें हमारे आसपास के लोग कह देते हैं कि हम यह नहीं कर सकते या हम खुद पहले ही सोच लेते हैं कि हम यह नहीं कर सकते। इस वजह से हम उसे करने की कोशिश भी नहीं करते। हमें हर काम को करने की पूरी कोशिश करना चाहिए, तभी हम वह काम कर पाएंगे।

– संदीप माहेश्वरी

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