खुद को अपनी कमी के साथ स्वीकार करें

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एक किसान के पास 2 घड़े थे। वह रोज़ दोनों घड़ों को एक रस्सी से बांधकर उनमें पानी भरकर लाता था, लेकिन उन दोनों घड़ों में से एक घड़ा थोड़ा सा फूटा हुआ था। इसकी वजह से किसान द्वारा लाया गया पानी आधा ही रह जाता था। अच्छे घड़े को इस बात का काफ़ी घमंड था कि वह बिल्कुल ठीक है वहीं दूसरे घड़े को काफी शर्मिंदगी महसूस होती थी। इसी वजह से घड़ा काफी उदास रहने लगा था।

एक दिन उसने किसान से कहा कि तुम रोज़ मेरे अंदर पानी भरकर मुझे घर लाते हो, लेकिन मेरे फूटे होने की वजह से तुम्हारी मेहनत बेकार हो जाती है। तब किसान घड़े से कहता है कि तुम उदास मत हो। कल जब मैं तुम्हें भरकर लाऊंगा, तब तुम रास्ते में छोटे-छोटे फूलों को देखना। अगले दिन घड़े ने वैसा ही किया। उसे कुछ समय तक तो अच्छा लगा, लेकिन बाद में वह फिर उदास हो गया। उसे उदास देखकर किसान ने घड़े से कहा कि तुमने गौर किया कि सारे फूल केवल तुम्हारी ही तरफ है, अच्छे घड़े की तरफ नहीं। मुझे तुम्हारी इस कमी के बारे में पता था इसलिए मैंने इस रास्ते में रंगबिरंगे फूलों के बीज लगा दिए थे। तुम अनजाने में ही सही, पर इन बीजों को सींच रहे थे। आज देखो इन पौधों पर कितने सुंदर फूल आ गए हैं। केवल तुम्हारी वजह से मैं इन फूलों को भगवान को अर्पण कर सकता हूं।

इसी तरह हम सभी में कोई न कोई कमी ज़रूर होती है। वही कमी हमें दूसरों से अलग और अनोखा बनाती है। इसी कमी के कारण हम इंसान बनते हैं इसलिए ज़रूरी है कि हम खुद को अपनी कमी के साथ स्वीकार करें और दूसरों को भी उनकी कमियों के साथ स्वीकार करें।

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