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दो साल में दुनिया से ‘ऐनक’ होंगे विलुप्त

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“चढ़े नाक पर पकड़े कान, कहो कौन है यह शैतान”, बचपन में जब यह पहेली मास्टरजी क्लास में पूछते थे तो अशोकनगर (गुना) की पोथीशाला की दालान में हम सब छोटे बच्चे जोर- जोर से चिल्लाते थे “ऐनक,ऐनक” । वे भी क्या दिन थे, जब हाथ में लकड़ी की काली पटिया, खड़िया पानी में घोलकर दवात की शीशी में भरकर साथ में लाते और बर्रू को दाढ़ी बनाने की खराब ब्लेड से नुकीला करके और  कलम के रूप में बनाकर पट्टी पर ‘क ख ग घ’ लिखना सीखते ।

हमारे मास्टरजी की तरह चेहरा बनाकर हमे ‘ई‘ ईख का और ‘ऐ‘ ऐनक का सिखाते थे । आज वही बचपन से दिमाग में चढ़ा ऐनक यानि चश्मे की प्रजाति पूरी दुनिया से लुप्त होने जा रही है । अगले दो साल के भीतर दुनिया में जैसे अब टाइपराइटर लापता हो गए| यदि आपको अपने बच्चों को यह बताना हो कि टाइपराइटर क्या होता था और कैसे काम करता था तो आपको अपने बच्चों को किसी म्यूजियम में लेकर जाना होगा ? तभी आप उसे टाइपराइटर के दर्शन करा सकेंगे । ठीक उसी प्रकार से दूर की चीजें साफ देखने के लिए बनाए गए चश्मे या पास रखी चीज को बारीकी से देखने, सुई में धागा डालने या किताब पढ़ने के लिए बनाया गया पास का चश्मा, अब दुनिया से विलुप्त हो जाएगा । आने वाले समय में चश्मा एक ‘एन्टिक’ चीज हो जाएगी ।

जी हां, यह एकदम सच है। इसराइल के ‘शार्रे झेडक मेडिकल सेन्टर, बार-इल्म विश्वविद्यालय’ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और नैनो पार्टिकल विभाग के प्रमुख प्रोफेसर झीव झालेव्शकी ने एक आई ड्रॉप का सूअर की आंखों पर सफल प्रयोग करके यह सिद्ध कर दिया है कि अगले दो साल के भीतर पूरी दुनिया से चश्मे यानि ऐनक पूरी तरह विलुप्त हो जाएंगे। अब जल्द ही उनकी आई-ड्राप्स का मनुष्यों की आंख पर क्लिनिकल ट्रायल होने जा रहा है| दो साल के भीतर आंखों में डाली जाने वाली यह दवाई मार्केट में उपलब्ध हो जाएगी ।

डॉ.झीव झालेव्हशकी के अनुसार, पढ़ने या दूर का देखने के लिए उपयोग में आ रहे चश्मे से सदा के लिए छुट्टी पाने के लिए किसी डॉक्टर या अस्पताल में जाने की जरूरत नहीं होगी| आप खुद ही अपने आप आपकी आंखों का चश्मा उतारकर फेंक सकते हैं ।

चश्मा उतारकर उसे सदा के लिए विदा करने के लिए तीन चरणों में यह विधि अपनाना होगी ।

१) पहले चरण में आपको अपने स्मार्टफोन में एक खास एप डाऊनलोड करना होगा । यह एप आपकी आंखों का रिफ्रेक्शन यानि वर्तनांक नापता रहेगा । वर्तनांक यानि आपकी आंख की पुतली का पानी कितना साफ है, यह नाप लेगा ।

२) दूसरे चरण में आपके मोबाइल से एक खास ‘लेजर’ पैटर्न बनेगा। इस पैटर्न को महज एक सेकंड के लिए आपको अपनी आंख की पुतली यानि ‘कॉर्निया’ के सामने रखना होगा । इससे कॉर्निया की ऊपरी सतह की महीन पर्त साफ होगी ।

३) कॉर्निया की हल्की लेजर पैटर्न से ऊपरी पर्त की सफाई करने के बाद विशेष तौर पर तैयार की गई “नैनो पार्टिकल्स” की बनी आई ड्रॉप्स की दो-दो बूंदें आंखों में डालना होगी । पलक झपकते ही आपकी दोनों आंखों का दूर की नजर का या पास की नजर का मायोपिक या प्रेसबायोपिक चश्मा उतर जाएगा। आप बिना चश्मे के अच्छी तरह दूर की चीजें देख सकेंगे और सुई में धागा बिना चश्मे की मदद से आसानी से डाल सकेंगे ।

यह जादुई आई ड्रॉप्स कोई करिश्मा नहीं, यह महज एक ऐसा पारदर्शी अतिसूक्ष्म कणों का बनाया द्रव है, जो आपकी आंख की पुतली में जाकर फैल जाता है  और उसका रिफ्रेक्टिव इन्डेक्स यानि ‘वर्तनांक’ सामान्य कर देता है। अभी जो लेजर पद्धति से चश्मे उतारने के ऑपरेशन किए जाते हैं, उनमें आंख के सर्जन पुतली या कॉर्निया को ठीक उसी तरह छील देते हैं, जैसे बढ़ई लकड़ी पर रंदा चलाकर लकड़ी को छीलता है। इजराइल में विकसित चश्मे उतारने की नई पद्धति में पुतली से कोई छेड़छाड़ या घिसाई-पिटाई नहीं की जाती, बल्कि उसकी ऊपरी पर्त की सफाई करके दवाई डाली जाती है । इस दवाई से कॉर्निया की ऊपरी सतह पर ablated pattern की रचना करके एक विशिष्ट झिल्ली की परत बनाई जाती है, जिससे दृष्टिदोष पूरी तरह से दूर हो जाता है। समय के साथ जब देखने में फिर तकलीफ हो तो पुन: आप फिर से इन ड्राप्स का उपयोग करके अच्छा देख सकते हैं ।

-डॉ.राम श्रीवास्तव

(लेखक वैज्ञानिक और समीक्षक हैं)

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