स्कूल में परेशान करते थे बच्चे, हल निकालने के लिए अपनाया ऐप

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कुछ बच्चों में बचपन से कोई कमी होने के कारण तो कुछ बच्चों को कमजोर समझ कर स्कूल में कई लोग उन बच्चों (Appilication For School Problems) को परेशान करते हैं। बचपन से जो बच्चे बोलने में जवाब देने में कमजोर रहते है उनको डराकर कई लोग उनका मज़ाक बनाते है। कई बार तो बच्चों के मन में मानसिक डर बन जाता है और स्कूल जाने से भी डरते हैं। दूसरे बच्चे ऐसे बच्चों को चिढ़ाकर और धमकाकर उनको परेशान करते हैं। बच्चों के बीच यह अक्सर हर स्कूल में होता है और कई बच्चे इसके डर से किसी से कुछ नहीं कह पाते।ऐसा ही एक मामला मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से सामने आया है जिसमे एक 9 साल की छात्रा ने स्कूल में चिढ़ाए जाने और धमकियों से परेशान होकर ‘एंटी बुलिंग मोबाइल एप्लिकेशन’ बनाई है। बताया जा रहा है कि इस ऐप की मदद से पीड़ित की पहचान उजागर किए बिना ऐसी घटनाओं की जानकारी सीधे अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकेगी। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि इस ऐप (Appilication For School Problems)  को बनाने वाली कक्षा 4 में पढ़ती है। उसका नाम मैदाईबाहुन मॉजा (Maidibahun Moja) है, इस छात्रा की इस कोशिश से राज्य सरकार भी खुश है।

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मैदाईबाहुन मॉजा (Maidibahun Moja) का कहना है (Appilication For School Problems) कि वह जब नर्सरी से में थी, तभी से उसको स्कूल में दूसरे स्टूडेंट्स बहुत परेशान करते थे जिसकी वजह से उसको काफी तकलीफें झेलनी पड़ती थी। इस से उसे बहुत प्रभावित होना पड़ा। इस सब से परेशान होकर उसने इस परेशानी का हल निकालने का फैसला किया। उसने कहा – “मैं नहीं चाहती थी कि कोई और बच्चा इस तरह की घटनाओं का सामना करे। उसने बताया कि स्टूडेट्स के एक समूह ने एक बार उसके खिलाफ गैंग बना लिया था। दूसरे स्टूडेंट्स से भी  बात न करने को कहा। उनमें से एक ने मेरे पैरों पर मुहर लगा दी थी। (Appilication For School Problems) मुझे इससे इतनी नफरत थी कि मैं हमेशा इसका समाधान ढूंढती रहती थी।”मॉजा ने बताया कि इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले यूजर को धमकी देने वालों के नाम सहित घटनाओं का विवरण देना होगा।

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इसके अलावा, इससे संबंधित व्यक्तियों (Appilication For School Problems) को भी संदेश भेज सकेंगे। इससे अधिकारियों को आवश्यक जानकारी मिलती है और वह आगे कार्रवाई करने का फैसला ले सकते हैं। मॉजा (Maidibahun Moja)  की मां दासुमलिन मॉजा ने बताया कि उसने पिछले साल सितंबर में एक ऐप-डेवलपमेंट कोर्स में दाखिला लिया था। इसके बाद कुछ महीनों में उसने ऐप डेवलप करना सीख लिया। मौदाईबाहुन मॉजा (Maidibahun Moja)  का यह कमाल सारे बच्चों के काम आएगा और बच्चों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।विप्रो अप्लाइंग थॉट्स (Wipro Applying Thoughts) इन स्कूल्स और टीचर फाउंडेशन ने 2017 (Teacher Foundation 2017 survey) में एक सर्वे किया था, जिसमें खुलासा हुआ था कि भारत में 42 प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में तंग किया जाता है।

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Vagisha pandey

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