वस्त्र नहीं, चरित्र देखिए

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स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda Motivational Story ) जब अमेरिका गये थे तो एक दिन वे गेरुए वस्त्र में एक सड़क से गुजर रहे थे। लोगों को उनके वस्त्र बड़े अजीब लगे। वे लोग उनके पीछे-पीछे चलने एवं हँसी-मजाक बनाने लगे।

शायद उन लोगों ने सोचा होगा कि यह कोई मूर्ख है। जब काफी भीड़ इकट्ठी हो गयी, तो स्वामी जी पीछे मुड़कर भीड़ की ओर देखकर बोले–‘Dear Sirs आपके यहाँ सभ्यता की कसौटी पोशाक है, पर हमारे देश में मनुष्य की पहचान उसके वस्त्रों से नहीं, चरित्र से होती है।’स्वामी जी का इतना कहना था कि भीड़ लज्जित होकर धीरे-धीरे बिखर गयी।

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एक अन्य प्रसंग में भी स्वामी जी ने हमें शिक्षा दी है |Swami Vivekanand की प्रसिद्धि देश विदेशो में फैली हुई थी जिसके कारण एक बार एक विदेशी महिला उनके विचारो से प्रभावित होकर उनके पास आयी और स्वामी विवेकानंद से बोली की मैं आपसे शादी करना चाहती हूँ ताकि आपके जैसा ही मुझे गौरवशाली पुत्र की प्राप्ति हो| जिससे हमारा पुत्र बड़ा होकर इस संसार को ज्ञान की प्राप्ति कराये और मेरा नाम रोशन करे|

इस पर स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Motivational Story) जी बोले की क्या आप जानती है की “मैं एक सन्यासी हूँ भला मै कैसे शादी कर सकता हूँ | अगर आप चाहो तो हमे आप अपना पुत्र बना ले| जिससे मेरा सन्यास भी नही टूटेगा और आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा”| इतना सुनते ही वह विदेशी महिला स्वामी विवेकानंद के चरणों में गिर पड़ी और बोली धन्य है आप| आप साक्षात् ईश्वर के रूप के सामान है जो किसी भी परिस्थिति में भी आप अपने धर्म के मार्ग से विचलित नही होते है|

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तीसरा प्रसंग कुछ ऐसा है- एक बार स्वामी विवेकानंद जी के पास एक व्यक्ति आया जो की बहुत दुखी था और आते ही स्वामी विवेकानंद जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मैं अपने जीवन में खूब मेहनत करता हूँ हर काम खूब मन लगाकर भी करता हूँ फिर भी आजतक मैं कभी सफल व्यक्ति नही बन पाया| उस व्यक्ति की बाते सुनकर स्वामी विवेकानंद ने कहा ठीक है आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोडा देर तक घुमाकर लाये तब तक आपके समस्या का समाधान ढूढ़ता हूँ इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने लेने चला गया और फिर कुछ समय बीतने के बाद यह व्यक्ति स्वामी विवेकानंद के पास वापस लौट आया |

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तो स्वामी विवेकानंद ने उस व्यक्ति से पूछा की यह कुत्ता इतना हाफ क्यू रहा है जबकी तुम थोड़े से थके हुए नही लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ|इसपर उस व्यक्ति ने कहा की मैं तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ जाता था जिसके कारण यह इतना थक गया है| इसपर स्वामी विवेकानंद जी मुस्कुराते हुए कहा बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते हो जिससे तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पाए| एकाग्र हो जाओ सफल हो जाओगे |

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