Hindi Kahani : सबको खुश करना नामुमकिन

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आप सभी को खुश कभी नहीं कर सकते (Hindi Kahani)| कुछ भी आलोचना आपके हिस्से आएगी ही| बेहतर होगा इन पर ध्यान न देते स्वयं के विवेक से आचरण करना और निर्णय लेना ही सही है| इसे ऐसे भी समझा जा सकता है | एक बार एक पिता-पुत्र एक घोडा लेकर कही जा रहे थे| पुत्र ने पिता से कहा ‘‘आप घोडे पर बैठें, मैं पैदल चलता हूं| पिता घोडे पर बैठ गए| मार्ग से मिलने वाले लोग कहने लगे, ‘‘बाप निर्दयी है| पुत्र को धूप में चला रहा है तथा स्वयं आराम से घोडे पर बैठा है| यह सुनकर पिता ने पुत्र को घोडे पर बैठाया तथा स्वयं पैदल चलने लगा|

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आगे जो लोग मिले, वे बोले, ‘‘देखो पुत्र कितना निर्लज्ज है ! स्वयं युवा होकर भी घोडे पर बैठा है तथा पिता को पैदल चला रहा है| यह सुनकर दोनों घोडे पर बैठ गए |अब लोग बोले, ‘‘ये दोनों ही भैंसे के समान हैं तथा छोटे से घोडे पर बैठे हैं | घोडा इनके वजन से दब जाएगा | जिव के प्रति दया नहीं है मन में | यह सुनकर दोनों पैदल चलने लगे| अब भी लोगों का बोलना बंद नहीं था | अब उनका कहना था कि ‘‘कितने मूर्ख हैं ये दोनों ? साथ में घोडा है, फिर भी पैदल ही चल रहे हैं |

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पिता-पुत्र के हर संभव प्रयत्न के बाद भी वे दुनिया को खुश नहीं करे पाए न ही आलोचना बंद कर पाए | तो अब आप समझ ही गए होंगे कि कुछ भी करें, लोग आलोचना ही करते हैं| लोगों को क्या अच्छा लगता है, इस ओर ध्यान देने से अच्छा है आपको और ईश्वर को क्या अच्छा लगता है इस पर ध्यान दें| दूसरों को खुश करने के प्रयत्न में खुद को दुखी करने से अच्छा है जैसे है वैसे रहे सभी कि जगह खुद को खुश रखे |

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