कल्पना की तस्वीर

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सैकड़ों साल पहले किसी राज्य में एक राजा राज्य करता था| राजा बेहद क्रोधी, लेकिन वीर था और उसकी पूरी जवानी युद्ध करते बीती थी| ऐसे ही किसी एक युद्ध के दौरान उसकी एक आँख और एक टांग जाती रही थी| एक बार राजा के मन में विचार आया कि अपनी एक तस्वीर बनवाई जाए और उसे राजमहल में लगाया जाए| अब उस ज़माने में कैमरे तो थे नहीं, सो देश-विदेश के नामी चित्रकारों को बुलाया गया| राजा ने सभी चित्रकारों को दरबार में बुलाकर कहा कि जो भी चित्रकार उसकी सबसे सुन्दर तस्वीर बनाएगा उसे मुँह मांगा इनाम दिया जाएगा| सभी चित्रकार एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे क्योंकि राजा एक तो लंगड़ा था और ऊपर से काना … इसकी सुन्दर तस्वीर कैसे बनेगी ? वे सभी राजा के क्रोधी स्वभाव से भी भलीभांति परिचित थे| यदि कहीं यह नाराज हो गया तो सीधे सर कलम करवा देगा| किसी भी चित्रकार के मुँह से बोल न फूटा|

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आखिरकार एक चित्रकार उठकर खड़ा हुआ और बोला कि मैं महाराज की तस्वीर बनाऊँगा| दरबार में उपस्थित सभी दरबारी और चित्रकार उसे हैरानी से देखते हुए सोचने लगे कि इसका मरना तो तय है| इस राजा की सुन्दर तस्वीर तो बन ही नहीं सकती|
खैर, चित्रकार ने लगभग एक महीने में राजा की एक तस्वीर बनाई और राजा को दिखाई| राजा ने तस्वीर देखी तो देखता ही रह गया| सभी दरबारियों ने भी जब तस्वीर देखी तो वाह-वाह कर उठे| राजा इतना प्रसन्न हुआ कि उसने चित्रकार को धन-दौलत से लाद दिया| फिर उसे ज़िन्दगी भर कुछ भी करने की जरूरत न रही| दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि उस चित्रकार ने राजा की कैसी तस्वीर बनाई थी ?

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हम बताते हैं, उस चित्र में राजा एक टांग मोड़ कर अपने रथ पर योद्धा की तरह बैठा हुआ था और हाथ में धनुष-बाण लिए, एक आँख बंद कर के शत्रु पर निशाना लगा रहा था| चित्रकार ने अपनी कल्पना-शक्ति का प्रयोग करते हुए राजा की कमियों को कुछ इस तरह प्रदर्शित किया कि वे खूबियों में बदल गईं| इसीलिये राजा, जो कि एक जन्मजात योद्धा था, इतना प्रसन्न हुआ|गुस्ताखी माफ़ से साभार

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