विपदाओं का आना स्वाभाविक

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एक समय गुरु नानक जी मरदाने ( सेवक ) के साथ बैठकर शबद कीर्तन में लीन थे | वे कीर्तन कर रहे थे और उनकी आँखे बंद थी| तभी अचानक जोरो की आंधी चलने लगी | आंधी इतनी तेज थी की उसने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया और पल भर में चारों ओर भयानक अंधेरा और धूल-मिट्टी का गुबार छा गया | मरदाना यह सब कुछ देख भयभीत हो गया| किन्तु गुरु नानक जी अभी भी शांत बने रहे | उन्होंने घबराये हुए मरदाना से कहा, ‘आप डरिए नहीं बस उस ऊपर वाले का शुक्रिया अदा कीजिए जो इस विषम परिस्थिति में भी हमको सुरक्षित किए हुए है| यह कलयुग है|

यहां इस तरह की विपदाओं का आना स्वाभाविक है|’ इनसे डरें नहीं बल्कि इनसे सामना करें| और हर समय आनंद के साथ जिंदगी बिताएं| ईश्वर का धायण करें और उन पर विश्वास रखे | गुरु नानक जी के के कथन का सार यह है कि जगत में विपदाएं आती रहेंगी | विपदाओं से बचाने के लिए ईश्वर हमारे साथ हर समय मौजूद है बस विश्वास करने भर की देर है| कई बार हम जीवन में विषम परिस्थितियों हर जाने है, घबरा जाते है और कई बार ईश्वर से शिकायत करते हुए उसे कोसने लगते है| जबकि इसकी बजाय हमें मुश्किलों से झूंझते हुए उसने पार पाने का का विकल्प ढूँढना चाहिए |

गुरु नानक के जीवन के कई ऐसे प्रेरक प्रसंग है जो मानव जीवन का पथ प्रदर्शित करते रहे है| उन्होंने अपने जीवन में मानव सेवा और मानव कल्याण के लिए कई काम किये और उपदेशों के जरिये मानव जाती को सही राह दिखाई है |यदि हम उनके उपदेशों का अनुसरण कर जीवन में आगे बढ़े तो कई समस्याओं से बचने के साथ सरल,सहज और सफल जिंदगी जी सकते है|

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