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Hindi Kahani : पैंट की ज़ेब में रखे रुपए

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घटना कुछ सालों पहले की है | मैने अपनी पेंट की जेब में 5 हजार रूपये रखे थे। दूसरे दिन सुबह घर से ऑफिस जाते समय दूसरी पेंट पहन ली और जिस पेंट में रूपये थे, घर पर छोड़ दिया। उसी दिन पत्नी ने उस पैंट को धुलवाने के लिये धोबी को दे दिया। जब शाम को ऑफिस से आया और पैंट में रखे रूपये के बारे में पत्नी से पूछा तब पता चला कि वह पैंट को धोबी (Washerman Story In Hindi) के पास धुलवाने के लिए दे दिया है।

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यह सुनते ही मैं घबरा गया और सोचने लगा कि अब तो रूपये मिलना मुश्किल है। मैं काफी थका हुआ था लेकिन चिन्तित होने के कारण उसी समय भागा-भागा घोबी के घर पहुंच गया। घोबी के घर में ताला लगा हुआ था। आस-पड़ोस में पता करने पर मालुम हुआ कि वे दोपहर से ही कहीं गये हुए है, पता नहीं कब तक वापिस आयेंगे। मैं निराश होकर घर की तरफ चल दिया। जब मैं सब्जी मण्डी के पास से गुजर रहा था तब ही ऐसा लगा कोई पीछे से आवाज दे रहा है।

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मुड़ कर देखता हूँ तो धोबी परिवार सहित मेरी तरफ ही आ रहा है। धोबी की पत्नी ने मेरे पूछने से पहले ही कह दिया, आपके पैंट की जेब में पांच हजार रुपये मिले हैं, कल सुबह आपके घर कपड़ों के साथ पहुंचा दूंगी’| धोबी की पत्नी ने अपने वायदा अनुसार सुबह कपड़ों के साथ पांच हजार रुपये वापिस कर दिये। मैंने उन रुपयों में से पांच सौ का नोट इनाम के तौर पर धोबी की पत्नी देने के लिए बढ़ाया। वे इन अतिरिक्त पैसों को लेने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हुई तथा कपड़े की धुलाई के जितने पैसे बनते थे, लेकर चली गयी।

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आज के इस युग में जहां चारों तरफ बेईमानी (dishonesty) और कुछ रूपयों के लिए लड़ाई-झगड़ा होता रहता है वहां आर्थिक रूप से कमजोर (financially weak) धोबी की इस ईमानदारी (honesty) को देखकर मैं आश्चर्य में पड़ गया और यह सोचने में विवश हो गया कि आज के युग में भी ईमानदारी (honesty) मौजूद है तभी यह दुनिया चल रही है। मनोज कुमार, सिताबपुर, कोटद्वार, गढ़वाल/ कदमताल पर प्रकाशित |

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