website counter widget

अंधा घोड़ा

0

शहर के नज़दीक बने एक फार्म हाउस में दो घोड़े रहते थे| दूर से देखने पर वो दोनों बिलकुल एक जैसे लगते थे | पास जाने पर पता चलता था कि उनमे से एक घोड़ा अँधा है | पर अंधे होने के बावजूद फार्म के मालिक ने उसे वहां से निकाला नहीं था बल्कि उसे और भी अधिक सुरक्षा और आराम के साथ रखा था|

पढ़ें अरुणाचल प्रदेश की लोककथा ‘नागकन्या’

अगर कोई थोडा और ध्यान देता तो उसे ये भी पता चलता कि मालिक ने दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बाँध रखी थी, जिसकी आवाज़ सुनकर अँधा घोड़ा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे-पीछे बाड़े में घूमता| घंटी वाला घोड़ा भी अपने अंधे मित्र की परेशानी समझता, वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता और इस बात को सुनिश्चित करता कि कहीं वो रास्ते से भटक ना जाए| वह ये भी सुनिश्चित करता कि उसका मित्र सुरक्षित वापस अपने स्थान पर पहुच जाए, और उसके बाद ही वो अपनी जगह की ओर बढ़ता|

Hindi Kahani : एक सच्चे संत की कहानी

बाड़े के मालिक की तरह ही भगवान हमें बस इसलिए नहीं छोड़ देते कि हमारे अन्दर कोई दोष या कमियां हैं| वो हमारा ख्याल रखते हैं और हमें जब भी ज़रुरत होती है तो किसी ना किसी को हमारी मदद के लिए भेज देते हैं| कभी-कभी हम वो अंधे घोड़े होते हैं, जो भगवान द्वारा बांधी गयी घंटी की मदद से अपनी परेशानियों से पार पाते हैं तो कभी हम अपने गले में बंधी घंटी द्वारा दूसरों को रास्ता दिखाने के काम आते हैं|

हम कई बार जरा सी परेशानी से भगवान् को कोसने लगते है कि ईश्वर हमारे साथ नहीं है | जबकि भगवान् किसी को अकेला नहीं छोड़ते उन्हें सब की फिक्र होती है| वे हमें राह दिखते है और हमारे जीवन की हर मुश्किल से हमें पार लगाते है | बात सिर्फ विश्वास और भरोसे की है| अच्छी ख़बर से साभार

Hindi Kahani : सच्चाई हमेशा ख़ुशी देती है…

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.