ईमानदार भिखारी

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यह हमें अचम्भित करने वाली एक ईमानदार भिखारी (honest beggar) की गजब की सच्ची कहानी है जो कि हम सबको सच्चाई और ईमानदारी की सीख देती है। बात कुछ समय पहले की है, हमारे दरवाजे पर एक लंगड़ा भिखारी (beggar) आने लगा था।

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शुरू में हम उसे कभी पैसे, कभी आटा और कभी चावल आदि दे दिया करते थे, किंतु जब उसने लगभग प्रतिदिन ही हमारे दरवाजे पर धरना देना शुरू कर दिया और बिना कुछ पाये वह टलने का नाम न लेने लगा तब घर के सब सदस्यों ने एकमत से निर्णय लिया कि आगे से भिखारी (beggar) को कुछ भी न दिया जाए। उस दिन मेरा मन कुछ ठीक नहीं था। तभी वह beggar आ टपका और गिड़गिड़ाने लगा – ‘साहब, कल से भोजन का एक दाना भी नसीब नहीं हुआ है। कुछ खाने को मिल जाए।’

किंतु मैंने डपट दिया और कुछ दिये बिना ही जाने के लिए उसे विवश कर दिया। उसी समय मेरे बड़े भाई साहब ने घर में प्रवेश किया। वे मुझसे बोले कि आज बोनस मिल गया है, मार्केट से सामान आदि लाने के लिए तैयार हो जाओ। किंतु उन्होेंने जैसे ही पर्स निकालने के लिए जेब में हाथ डाला, वे दंग रह गये। उन्होनें इधर-उधर देखा, फिर से जेब तलाशी ली और कहने लगे-‘अरे! मेरा पर्स कहाँ गया?’भाई साहब घबराये हुए उसी क्षण उल्टे पाँव वापस बाहर की तरफ भागे।

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उसी समय सामने वह लंगड़ा भिखारी (beggar) आते हुए दिखाई दिया। उसे भाई साहब को चिंतित मुद्रा में देखकर पूछ ही लिया-‘साहब, लगता है आपका कुछ खो गया है।’ भाई साहब बोले-‘हाँ, भाई, मेरा पर्स पता नहीं कहाँ गिर गया है। पूरे आठ हजार रुपये थे उसमे।’ भिखारी प्रसन्न होते हुए बोला-‘तब तो यह पर्स आपका ही होगा साहब!’ उसने अपने चिथड़े में से पर्स निकाला और भाई साहब को थमाता हुआ बोला- ‘यह लीजिये, गिन लीजिये साहब! रुपये पूरे है न? यह तो अच्छा हुआ कि पर्स मुझे मिल गया, अन्यथा भगवान ही जानते होंगे आपको कितना दुःख और परेशानी होती।’

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भाई साहब ने रुपये गिने तो पूरे आठ हजार ही थे। वे उसकी ईमानदारी (honesty) तथा परहित की इस निष्ठा (loyalty) को देखकर दंग रह गये। उन्होंने खुश हो कर उसे पाँच सौ रुपये देने चाहे, पर उसने उसे लेने से इन्कार कर दिया। वह बोला-‘यदि कुछ देना ही है तो दो रोटी दे दीजिये इस भूखे पेट के लिये।’ रोटियाँ पाकर, वह सहज भाव से चुपचाप वहां से चला गया, उसके लिए सब कुछ सामान्य हो गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो। हम उस गजब के भिखारी को बस देखते ही जा रहे थे और अत्यन्त गरीबी के बावजूद उसकी इस ईमानदारी को देखकर अचंम्भित थे। कदमताल से साभार |

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