Hindi Kahani : बिस्कुट का दूसरा पैकेट

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एक महिला रात को बस अड्डे में अपने गाड़ी का इंतजार कर रही थी। उसकी गाड़ी आने में अभी घंटे से भी ज्यादा समय बाकी था। अपना समय बिताने के लिए उसने स्टाल से किताब और बिस्कुट का एक पैकेट खरीदा और एक खाली सीट देखकर वहां बैठ गई। जब वह किताब पढ़ने मे तल्लीन थी तो एक आदमी उसकी बगल में बैठ गया। न जाने कब उसने महिला के बेग से बिस्कुट (Biscuit) निकाले और खाने लगा। उसने महिला को बिस्कुट (Biscuit) खाने को पूछा। इससे महिला को चिड़ मच गयी। उसने पूरा पेकैट उस आदमी के हाथ से अपने पास ले लिया। अब वह जितनी बार बिस्कुट लेती, वह आदमी भी एक मांग लेता, आखिर में जब एक बिस्कुट बच गया, वह सोचने लगी कि देखो अब यह आदमी क्या करता है। वह अपने चेहरे में हल्की सी मुस्कुराहट लाता है और आखिरी बिस्कुट भी उठा लेता है और उसके दो टुकड़े करता है।

वह आधा बिस्कुट महिला को देता है। महिला मन नही मन बहुत चिढ़ गयी और विचारने लगी कि यदि मैं इतनी शरीफ न होती तो इस आदमी की अभी तक आंखें फोड़ चुकी होती। है भगवान…. यह कितना बेशर्म आदमी है जिसमें थोड़ी सी भी सभ्यता (etiquette) का नाम नहीं है। महिला का वहां बैठे-बैठे दम घुटने लगा था। अब जैसे ही गाड़ी आयी, उसने तसल्ली की सांस ली। अपना सारा सामान इकट्ठा किया, गुस्से से बिस्कुट चोर की तरफ देखा और पांव पटकती हुई बस में सवार हो गयी। बस के थोड़ी दूर जाने पर वह अपनी पूरी किताब पढ़ चुकी थी। वह किताब को बैग में रखने लगी। उसकी आंखे खुली की खुली रह गयी जब उसने देखा कि बिस्कुट (Biscuit) का पैकेट वैसे के वैसे ही रखा हुआ था।

यदि यह मेरा पेकेट है…… इसका मतलब है कि वह पेकेट उस आदमी का था और वह अपने बिस्कुट उसके साथ शेयर कर रहा था। महिला को अब अपनी करनी पर बहुत अफसोस होने लगा था, लेकिन काफी देर हो चुकी थी। उसे ग्लानी महसूस हो रही था कि निर्दयी और बिस्कुट (biscuit) चोर तो वह स्वंय है, न कि वह आदमी। कदमताल से साभार |

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