Hindi Kahani : बोझ लेकर चलोगे तो आगे कैसे बढ़ोगे।

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जीवन से परेशान लोग एक बाबा के आश्रम में अक्सर अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए आया करते थे।बाबाजी उन्हें कहते की बोझ कम करो बोझ कम करो। सब ठीक हो जायेगा। लेकिन ये सुझाव बाबा के आश्रम में ही रहने वाले उनके एक शिष्य को समझ नहीं आता था. एक दिन व्याकुल हो उसने बाबा से पूछ ही लिया की गुरूजी क्षमा चाहता हूँ लेकिन एक प्रश्न मुझे कई दिनों से व्यथित कर रहा है वो ये की जब आपके पास इतने सारे लोग परेशान होकर आते हैं तो आप उन्हें बस इतना कहकर विदा कर देते हैं की बोझ कम करो बोझ कम करो।

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क्या ऐसा कहने मात्र से उनके बोझ ख़त्म हो जायेंगे ? मैं यही सोचकर परेशान हूँ चिंतित हूँ। कृपया मुझे इसका समाधान बताएं।तो बाबाजी मुस्कराये और अपने शिष्य को चिंतित देख उन्होंने कहा की तुम्हारी चिंता का कारण भी बोझ ही है। इतना बोझ लेकर चलोगे तो आगे कैसे बढ़ोगे। इसलिए अपना बोझ कम करो। गुरूजी के इस उत्तर से शिष्य और चिंतित हो गया और कहने लगा गुरूजी मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है। आपने तो मेरी जिज्ञासा को और भी बढ़ा दिया।

तो गुरूजी ने उससे कहा, ‘ तुम मेरे साथ जंगल में चलो, वहीं पर मैं तुम्हें बोझ कम करने का राज बताता हूं’| और वह दोनों जंगल की ओर चल दिए| रास्ते में गुरूजी अपने शिष्य को ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाने लगे कई रोचक बातें बताने लगे जिससे शिष्य को आनन्द आने लगा। गुरूजी ने देखा की शिष्य पूर्ण आनंद की स्थिति में है तब गुरु जी रुक गए और उन्होंने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और शिष्य को दे दिया और कहा, इसे पकड़ो और चलो|

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शिष्य की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि गुरु जी पत्थर उठाने के लिए क्यों कह रहे हैं| लेकिन उसने कोई सवाल जवाब नहीं करते हुए गुरु जी की बात को मानना ही उचित समझा और पत्थर को उठाया और चलने लगा| अब फिर से गुरूजी आगे-आगे ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाते हुए चलने लगे और पीछे -पीछे पत्थर हाथ में उठाये शिष्य चलने लगा। कुछ समय बाद शिष्य के हाथ में दर्द होने लगा, लेकिन वह चुप रहा और कहानियां सुनते सुनते चलता रहा|

लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उससे दर्द सहा नहीं गया, तो उसने कहा कि गुरुदेव अब मैं इस पत्थर का वजन नहीं उठा सकता हूं| मेरे हाथों में बहुत तेज दर्द हो रहा है| और इसी कारण मुझे आपके द्वारा सुनाई जाने वाली ज्ञानवर्धक बातें भी रुचिकर नहीं लग रही है। तब गुरूजी ने कहा कि पत्थर को नीचे रख दो| पत्थर को नीचे रखने से शिष्य को बड़ी राहत महसूस हुई| तभी गुरूजी ने कहा:-‘बोझ कम करने का राज’| शिष्य ने कहा, ‘मैं समझा नहीं गुरुवर’|

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गुरूजी ने कहा:- जिस तरह इस पत्थर को 1 मिनट तक हाथ में रखने पर थोड़ा सा दर्द होता है और 1 घंटे तक हाथ में रखने पर ज्यादा दर्द होता है| ठीक उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक हम अपने जीवन में रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दुखी और निराश रहेंगे| और अधिकांश लोग इसी दुःख रूपी पत्थर को अपने मन में बैठा लेते हैं। तो उनका मन उस दुःख से थक जाता है और वह सुख का आनंद नहीं ले पाता फलस्वरूप लोग परेशान होते रहते हैं।

सीख – दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक हम अपने जीवन में रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दुखी और निराश रहेंगे| और अधिकांश लोग इसी दुःख रूपी पत्थर को अपने मन में बैठा लेते हैं। तो उनका मन उस दुःख से थक जाता है और वह सुख का आनंद नहीं ले पाता फलस्वरूप लोग परेशान होते रहते हैं। इसलिए अपने मन से दुखों का,चिंता का ,जलन का ,बोझ कम करो और जीवन का आनंद लो।

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