Hindi Kahani : खुद की पहचान बना…

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एक दिन अचानक रमा के घर उनकी बेटी की दोस्त मेघा आई। मेघा को देखते ही रमा बोली अरे मेघा! तुम कब आई? “नमस्ते आंटी! आज ही आई और देखिए आपसे मिलने चली आई। सोनी कहाँ है? ससुराल में या वह भी दीवाली पर घर आई है?” मेघा ने पूछा। सोनी का नाम आते ही रमा जी के चेहरे पर उदासी सी छा गई। वे एकदम चुप सी हो गई। क्या हुआ आंटी? सब ठीक है न? सोनी ठीक है न।? मेघा ने घबराते हुए कहा। कुछ ठीक नहीं है, बेटा। उसकी शादी सफल नहीं रही। दहेज के लालची थे सभी। तलाक होकर उन सब से छुटकारा तो मिल गया, पर मेरी हंसती-खेलती बेटी पता नहीं कहां खो गई? अपने कमरे में ही रहती है। न किसी से मिलना-जुलना, न बातचीत बस जिंदा लाश बनी घूम रही है। आंटी ने रुआंसा होते हुए मेघा से कहा।

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मैं अभी उससे मिलकर आती हूँ आंटी। आप निश्चिंत रहिए, मैं आ गई न। आपको आपकी पुरानी सोनी देकर जाउंगी। मेघा ने रमा से कहा और चली गई सोनी से मिलने उसके कमरे में। सोनी कहाँ हो भई? मिलोगी नहीं हमसे। लगता है अपने कमरे में हो। ठीक है मैं ही आ जाती हूं। मेघा ने जैसे ही कमरे में पैर रखा, वह अपनी दोस्त को पहचान ही नहीं पाई। शून्य में देखती आंखे, न चेहरे पर कोई भाव। कैसी हो सोनी? पहचाना मैं, मेघा। मेघा ने कहा। मेघा ने मानो सोनी के शांत पड़ी भावनाओं और जज्बातों पर कंकड़ फेंक दिया हो। ऐसा लगा जैसे वह गहरी नींद से जागी हो। अरे मेघा तुम? सोनी ने कहा। ये क्या हाल बना रखा है? मेगा ने सोनी को देखते ही कहा।

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सोनी ने जवाब दिया, जमाने ने बना दिया दोस्त। तेरी सोनी कहीं खो गई। इतना कहते ही सोनी की आंखों से टप-टप आंसू गिर पड़े। कोई कहीं नहीं गया है। बस तुझे अपने अंदर झांकने की जरूरत है। तू वही सोनी है जो काॅलेज में दूसरों के लिए लड़ जाती थी और उन्हें हिम्मत देती थी। फिर तूने क्यों हार मान ली। तूने भी तो जंग जीत ली है। दूसरों की गलती के लिए खुद को क्यों मार रही है? अपने अंदर की खुशी, मुस्कराहट, डर, गुस्सा, नफरत सब निकाल दे। खुद से खुद की पहचान कर।

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इस तरह घुटने से क्या किसी का फायदा हुआ है? तुझे तो आजादी मिल गई। उसका जश्न मना।चल बाहर घूम कर आते हैं। अब मना मत करना, तुझे मेरी कसम। मेघा ने सोनी का हाथ पकड़ते हुए कहा। तू बिल्कुल नहीं बदली। अपनी बात मनवा कर ही मानती है।लगता है मैं तेरा ही इन्तजार कर रही थी। आज वाकई में सबकुछ करने का दिल कर रहा है। चल मस्ती करते हैं। सोनी मानों एक बार फिर जी उठी हो। ये हुई न बात। इतना कहकर मेघा ने सोनी को गले से लगा लिया और दोनों सखियां एक-दूसरे के गले लग खुशी के आंसू रोने लगी।

डॉ. मधु कश्यप

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