15 गोलियां खाकर दुश्मनों को मार गिराने वाला

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ज़िंदगी का आखिरी सत्य मृत्यु होता है, जिस पर विजय पाना नामुमकिन होता है परन्तु यदि अटल विश्वास हो,दिल में जज्बा हो और देश या समाज के लिए कुछ करने की ज़िद हो तो मौत को भी मात दी जा सकती है| इस बात के जीते-जागते उदाहरण हैं भारतीय सेना के जांबाज सिपाही परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव, जिन्होंने 15 गोलियां लगने के बाद भी दुश्मनों को मौत के घाट उतारा और आज भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर सेवा दे रहे हैं|

10 मई, 1980  को जन्मे योगेंद्र का बचपन अनुशासन में बीता| उनके पिता करनसिंह यादव भी सेना से रिटायर्ड थे| वे अक्सर पिता के साथ बैठकर सेना की वीरता के किस्से सुनाया करते थे और खुद ने सेना में भर्ती होने का प्रण कर लिया|  बड़े होते ही उन्होंने अपना यह अरमान पूरा किया| महज 16 साल की उम्र में वे सेना का हिस्सा बनने में सफल रहे|

मई 1999 में उनकी शादी हुई और उसके 15 दिन बाद ही कारगिल युद्ध के कारण उन्हें वापस सीमा पर जाना पड़ा, जहां से वे लौटकर नहीं आए| कारगिल में उन्होंने लगातार दुश्मनों का सामना किया|

3 और 4 जुलाई 1999 की रात में जो हुआ, वह हिन्दुस्तान के पराक्रम का स्वर्णिम अध्याय  है, जिसे सुन-पढ़कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं| रूह कांप जाती है और आंखें भीग जाती हैं| उस दिन कुछ ऐसा हुआ, जिस पर आज भी समूचा देश गर्व करता है और सरकार, जिसके लिए एक 19 वर्षीय युवा को परमवीर चक्र देने पर मजबूर हो गई|

दरअसल, 3 जुलाई को कारगिल युद्ध के दौरान बटालियन 18 ग्रेनेडियर  के  सैनिकों को 2590 मीटर ऊंचे टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने का आदेश मिला| इनमें योगेंद्र यादव भी शामिल थे| जब वे टाइगर हिल के टॉप से 60 मीटर नीचे थे तो पाकिस्तानी सैनिकों से उनका सामना हुआ, जिसमें उनके कई साथी शहीद हो गए| इसके बाद पाकिस्तानी सैनिक भारतीय जांबाजों को सुस्त पाकर लौट गए| कुछ देर बाद भारतीय सैनिकों ने दुश्मनों पर गोलियां दागी तो दुश्मनों ने पलटकर फायरिंग की, जिसमे योगेंद्र को छोड़कर सभी जवान शहीद हो गए| योगेंद्र यादव को भी कई गोलियां लग चुकी थीं, उनकी केवल सांसें चल रही थीं| दुश्मनों ने मरे हुए सैनिकों पर गोलियां दागी, योगेंद्र यादव के सीने में भी फिर से गोलियां दागी| योगेंद्र के शरीर में कुल 15 गोलियां लग चुकी थीं| उन्हें एक पल को लगा कि मैं मर चुका हूं, पर अगले ही पल उनकी आंखें खुली और ग्रेनेड निकालकर उन्होंने बचे हुए कई पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया| अब उनके सामने चुनौती अपने सैनिकों को छिपे हुए दुश्मनों की जानकारी देने की थी, तब उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक नाले द्वारा लुढ़ककर नीचे आया और साथियों को पूरी जानकारी दी गई और सभी पाकिस्तानी बनकर उड़ा दिए गए| कमाल की बात यह थी कि 15 गोलियां खाने के बाद भी वह जांबाज ज़िंदा रहा,दुश्मनों को मारा और टाइगर हिल से नीचे आया, वह आज भी हमारे बीच वीरता के एक प्रतिमान के रूप में जिन्दा है| योगेंद्र यादव सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र पाने वाले सैनिक हैं|

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