बिना हाथों के करते हैं हर काम

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हमारे समाज में दिव्यांगता को एक अभिशाप माना जाता है| लोग उनसे कोई उम्मीद नहीं रखते और उनके लिए एक अजीब सी करुणामय सहानुभूति प्रकट करते हैं, जो किसी दिव्यांग को दिव्यांग होने का बोध कराती है| वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके हौसले की आड़ में न तो परिस्थिति आती है और न ही दिव्यांगता | वे वह सब काम करते हैं, जो एक साधारण इंसान को करना चाहिए| यही नहीं वे हर कार्य को बेहतर तरीके से करते हैं|

आज हम आपको एक ऐसी ही अनूठी शख्सियत से रूबरू करवाने जा रहे हैं जिनके दोनों हाथ नहीं हैं परन्तु वे जिला कार्यलय में एक कर्मचारी के तौर पर कार्य करते हैं| साथ ही वे घरेलू कार्यों में ट्रैक्टर तक चला लेते है इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है की वे कितने आत्मविश्वाशी हैं|

हम बात कर रहे हैं उत्तरप्रदेश में कुशीनगर के पास कोइंदी बुज़ुर्ग के रहने वाले नीरज राय की, जो आज की हालत में किसी सुपर हीरो से कम नहीं हैं| दरअसल, नीरज के दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन वे अपने कटे हाथों को अपनी कमजोरी मानने के लिए  तैयार नहीं हैं| वे घरेलू कार्यों से कार्यालयीन कार्यों तक सब कुछ साधारण इंसान की तरह करते हैं| वे जिला कार्यालय में बतौर कर्मचारी काम करते हैं| वहां फ़ाइल एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हो या फिर लिखाई-पढ़ाई का काम, वे सब कुछ तय समय सीमा में करते हैं बिना किसी की मदद मांगे| इससे वे कार्यालय में अपने कनिष्ठ तथा वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम करते हैं|

जब बात घरेलू काम की आती है तो चाहे खेत में ट्रैक्टर चलाना हो या फिर कपड़े धोना हो, किसी भी काम के लिए वे अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं है| बात यहां तक तो ठीक है, लेकिन हैरत की बात यह है कि वे अपने पैरों से सुई में धागा तक पिरो लेते हैं| उनके पारिवारिक सदस्य बतातें हैं कि प्रारम्भ में कुछ समस्याएं आईं परन्तु आज वे आत्मनिर्भर हैं| यही नहीं नीरज अपने परिवार का भरण-पोषण भी करते हैं| आज ज़िंदगी की छोटी-छोटी समस्याओं से हारकर बैठने वालों को नीरज राय से प्रेरणा लेनी चाहिए|

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