बेटी ने किया बीमार मां का सपना पूरा

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जो सपने खुली आंखों से देखे जाते हैं, वे अवश्य पूर्ण होते हैं, फिर चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो बशर्ते आपकी निष्ठा और समर्पण अपने उद्देश्य के प्रति पूरा होना चाहिए| ऐसी ही एक कहानी है धार जिले के ग्राम बाग के चाय बेचने वाले दुलीचंद ब्रजवासी की बेटी रीमा ब्रजवासी की, जिसने अपनी मां के सपने को पूरा किया और अब वह समाज की पहली डॉक्टर बनने जा रही है|

दरअसल, रीमा के पिता ग्राम बाग में ही एक चाय की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं| रीमा की मां पिछले दस वर्षों से एक बीमारी से जूझ रही है, ऐसे में उनके इलाज के साथ घर चलाना कितना मुश्किल होता होगा, इसका आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है| इसके बावजूद उन्होंने रीमा को पढ़ाई के लिए इंदौर भेजा और उसके लिए कर्ज लेकर उसे नीट की तैयारी करने के लिए कोटा भेजा| पढ़ाई का खर्च उठाना और घर चलाना दुलीचंद के लिए मुश्किल काम था| उन्होंने येन-केन प्रकारेण बेटी की पढ़ाई का खर्चा उठाया और अब वे इस प्रवेश परीक्षा में चयनित हो गई| रीमा अपने समाज की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं| कलेक्टर दीपक सिंह ने धार में रीमा का सम्मान किया।

रीमा ने बताया कि उसकी बीमार मां की जिद थी कि उनकी बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हो जाए| मुझे डॉक्टर बनाना उनका सपना था, जो अब पूरा होने जा रहा है| बात यहीं तक सीमित नहीं है| दुलीचंद की दो बेटियां और हैं, जिनमें से बड़ी बेटी शिवानी को उन्होंने बीई करवाया। वह बेंगलुरु में काम करती है और एजुकेशन लोन भर रही है। दूसरे नंबर की बेटी ने बीएससी किया है। वह फैशन डिजाइनिंग में करियर बनाना चाहती है। एक ओर हमारे समाज में बेटियों को पढ़ाई-लिखाई से दूर रखा जाता है, वहीं दूसरी ओर इस परिवार ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाई तथा बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करवाई| इससे समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए|

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