70 वर्षीय बुजुर्ग ने खोद दिया कुआं

0

मानव की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे उसकी क्षमताएं घटती जाती हैं लेकिन छतरपुर के एक सत्तर वर्षीय बुजुर्ग ने उम्र और स्थिति पर निर्भर सारे मानक तोड़ दिए| उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी सभी को पानी पिलाने के लिए अकेले  ही 35 फ़िट गहरा कुआ खोद दिया| इन बुजुर्ग से आज युवाओं को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है, वहीँ प्रशासन को सबक लेने की|

छतरपुर जिले में 300 नागरिकों की आबादी वाला एक गांव प्रतापपूरा है, जहां जल आपूर्ति के लिए केवल एक हेडपम्प थ इस हेंडपंप से गांव की जनसंख्या की प्यास बुझाना नामुमकिन था| राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से इस संबंध में कई बार शिकायत की गई लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी, किन्तु एक 70 वर्षीय बुजुर्ग़ सीताराम राजपूत से यह सब देखा नहीं गया| उन्होंने  गांव की प्यास बुझाने की ठानी तथा अकेले ही कुआ खोदने में जुट गए|

सत्तर वर्ष की उम्र हिलती हुई गर्दन और दुबले-पतले हाथ पैर, भला कौन विश्वास करेगा कि वे कुआ खोद देंगे, लेकिन आठ महीने में ही उन्होंने कुए में पानी निकाल दिया| इतने में भी प्रकृति का कहर उनकी मेहनत पर टूटा| बड़ी मशक्क्त से खोदे कुए में फिर मिट्टी धंस गयी, लेकिन सीताराम ने हार नहीं मानी और ढाई वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद फिर से कुआ 35 फ़ीट गहरा कर दिया, जिसका पानी आज पूरा गांव पी रहा है|

आज सीताराम राजपूत क्षेत्र के हीरो हैं| उन्हें छतरपुर का मांझी कहकर सभी सम्मान दिया जाता है | आज सभी को सीताराम राजपूत से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि असंभव कुछ भी नहीं है| इससे प्रशासन और सरकार को सबक लेना चाहिए कि जो काम सरकार को करना चाहिए था वह कर नहीं पाई और एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने कर दिखाया|

Share.