कोरोना: 225 से अधिक वैश्विक हस्तियों ने राहत कोष के लिए उठाया यह कदम

0

 एक ओर जहाँ दुनिया का हर आम और खास इन्सान अपनी और से कोरोना से निपटने की तैयारी कर रहा है और किसी भी हाल में इस जंग को जीतना चाहता है वही इसी क्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन और कैलाश सत्यार्थी तथा अर्थशास्त्री कौशिक बसु सहित 225 से अधिक वैश्विक हस्तियों ने एक अलग ही मुहीम छेड़ दी है. संयुक्त रूप को एक पत्र के जरिये अपना सन्देश देते हुए इन्होने 2,500 अरब डॉलर के कोरोना वायरस वैश्विक स्वास्थ्य और आर्थिक सुधार योजना पर सहमति के लिए जी-20 की बैठक आयोजित करने की मांग रखी है. इन हस्तियों ने अपने पत्र में लिखा ‘’कोविड-19 के मद्देनजर पैदा हुए स्वास्थ्य और आर्थिक संकट का समाधान करने के लिए जी-20 शिखर सम्मेलन तत्काल बुलाया जाए.’’

बता दे कि जी-20 देशों ने 26 मार्च को एक व्यापक आर्थिक मंदी का अंदेशा जताते हुए 5000 अरब डॉलर के राहत पैकेज का मसौदा तैयार किया है. कोरोना वायरस महामारी से दुनिया भर में 6 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है . अपने पत्र में  सेन, सत्यार्थी और बसु के साथ अन्य प्रमुख वैश्विक हस्तियों ने हस्ताक्षर हैं, जिनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन और टोनी ब्लेयर, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांड एस्पिनोसा, श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक सुमन बेरी जैसे नाम शामिल हैं. पत्र में कहा गया है कि फिलहाल सऊदी अरब की राजधानी रियाद में इस साल नवंबर के अंत तक जी-20 की बैठक नहीं होने वाली है. ऐसे में तत्काल कार्रवाई जरूरी है क्योंकि गरीब देशों को कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए जिस 2500 अरब डॉलर की सहायता की जरूरत है, उसके बेहद छोटे हिस्से का आवंटन किया गया है.

पत्र के मुख्य अंश –

पूरी दुनिया एक अभूतपूर्व वैश्विक संकट का सामना कर रही है. इस सदी में पहली बार वैश्विक गरीबी बढ़ रही है. इसलिए संकट का सामना कर रहे गरीब देशों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं.

वैश्विक स्वास्थ्य एवं आर्थिक आपदा में और 44 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी में फंस सकते हैं तथा 26.5 करोड़ अतिरिक्त लोगों को कुपोषण का सामना करना पड़ सकता है.

जी-20 की कार्रवाई के बिना महामारी के चलते पैदा हुई मंदी और गहरी होगी और इससे सभी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा. हालांकि दुनिया के सबसे अधिक कमजोर और गरीब देशों पर इसका सबसे अधिक असर होगा.

 ‘दुनिया की 85 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाले जी-20 देशों के पास इसका मुकाबला करने की क्षमता है.

पत्र में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में सबसे गरीब देशों के सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है.

एक वैक्सीन या टीकों के विकास, व्यापक उत्पादन और समान वितरण के लिए वैश्विक स्तर पर तालमेल की जरूरत है ताकि वो जल्द से जल्द हर जगह और सुचारू रूप से उपलब्ध हों.

 हम मांग करते हैं कि प्रत्येक जी-20 सदस्य देश वैक्सीन एलायंस गवीके लिए 7.4 अरब डॉलर की भरपाई में पूरा समर्थन करें. यह एलायंस 2021-2025 के बीच 30 करोड़ बच्चों का टीकारण करेगा जिससे कि 80 लाख तक जानों को बचाया जाएगा.

 

Share.