बस कंडक्टर बनेगा कलेक्टर

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गर हौसलें हो बुलंद मंजिल (Bus Conductor Will Become IAS) मिल ही जाती हैं, एक कदम तुम बढाओ 10 कदम वो पास आती हैं। ये महज़ एक कविता नहीं बल्कि हक़ीक़त है एक ऐसे नौजवान की जिसने ये साबित कर दिया कि अगर मन मे कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो कोई ताकत कोई मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती है। हम बात कर रहे है 29 साल के मधु (Madhu) की, जो कर्नाटक (Karnatak) के एक छोटे से गांव मालवल्ली (Malavalli) में रहते हैं और बेंगलुरु मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (Bangaluru Metropolitan Transport Corporation) की बस में कंडक्टरी का काम करते हैं। पूरे दिन बस की भीड़ में टिकिट देना, चेक करना, भीड़ को संभालने का थका देने वाले काम के बाद, मधु ने जब गहरी नींद ली तो एक सपना देखा।

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सपना बड़ा अफसर बनने का (Bus Conductor Will Become IAS)। ठीक वैसे ही जैसे उनके अफसर सी. शिखा हैं, जो BMTC के मैनेजिंग डारेक्टर हैं और बस लग गए अपने सपने को पूरा करने के जुनून में। दिन में 8 से 9 घंटे नौकरी करना और उसके बाद कम नींद लेकर सवेरे 4 बजे उठ जाना और फिर 5 घंटे प्रशासनिक सेवा परीक्षा के तैयारी करना। सबसे बड़ी बात तो ये है कि मधु ने किसी कोचिंग क्लास का सहारा नही लिया बल्कि उनके अपने अफसर शिखा उन्हें हफ्ते में 2 घंटे गाइड कर देते थे, साथ ही इंटरनेट की मदद से उन्होंने अपने नोट्स तैयार किए।

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पिछले साल जून में मधु (Bus Conductor Will Become IAS) ने प्रारम्भिक परीक्षा दी और उसे पास करने के बाद अक्टूबर में मुख्य परीक्षा दी, और उसे भी उन्होंने अच्छे नम्बरों से पास कर लिया है। अब 25 मार्च के इंटरव्यू में तय होगा कि वो IAS बनेंगे या आईपीएस (IPS)। हम आपको बता दें इसी नौकरी के साथ उन्होंने ग्रेजुएशन और पोलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। विशेष बात ये है कि मधु अपने परिवार में पहले इंसान हैं जिन्होंने पढ़ाई की है।

जो लोग आज कई सुविधाओं के साथ पढ़ाई करने के बाद भी विफल होकर हालातों से हार मान लेते हैं तो मधु (Bus Conductor Will Become IAS) उनके लिए एक प्रेरणापुंज, एक रोल मॉडल हैं, क्योंकि इन तमाम मुश्किलों के साथ मधु ने साल 2014 में कर्नाटक प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी जिसमें वे फैल हो गए। उसके बाद साल 2018 में UPSC की परीक्षा दी फिर फैल हुए लेकिन नहीं फैल हुआ तो उनका कुछ बन कर दिखाने का जज़्बा। और फिर कठोर मेहनत बस में भी और पढ़ाई में भी और उसका परिणाम है ये रिजल्ट। हम उन सभी लोगों से ये कहना चाहते हैं जो विफलता से निराश हो जाते हैं, या मुश्किलों से घबराकर अपने सपनो को भूल जाते हैं कि जीवन मे संकल्प से ही बड़े काम होते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि, “सम्भव को जानने का एक ही तरीका है असम्भव के पार चले जाना।”

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Vishwambharnat Tiwari

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