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माता को लगा ठंडे खाने का भोग

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इंदौर में आज शीतला सप्तमी पर महिलाओं ने सुबह-सुबह शीतला माता को ठंडे खाने का भोग लगाकर पूजा-अर्चना की| इसके बाद घरों पर हल्दी के छापे लगाए गए| आज के लिए मंदिरों में भी विशेष तैयारियां की गई थीं| महिलाओं ने बुधवार रात को ही माता के लिए भोजन बना लिया था|

शहर के प्राचीन शीतला माता मंदिर, बड़ा गणपति स्थित शीतलामाता मंदिर सहित शहर के लगभग सभी मंदिरों में सुबह से महिलाओं की भीड़ लगी थी| आज हम आपको बताने वाले हैं कि शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है|

शीतला सप्तमी व्रत की पौराणिक कथा –

बहुत समय पहले शीतला सप्तमी के दिन एक बूढ़ी औरत और उनकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा| उन्होंने रात को ही खाना बना लिया था क्योंकि इस दिन शीतला माता को ठंडे खाने का भोग लगाया जाता है, लेकिन दोनों बहुओं ने ताजा खाना बनाकर खा लिया क्योंकि उन्होंने कुछ समय पहले ही बच्चों को जन्म दिया था|

जब यह बात उनकी सास को पता लगी तो वे बहुत नाराज हुई| इसके बाद दोनों नवजातों की भी मृत्यु हो गई| इससे नाराज सास ने दोनों बहुओं को घर से निकाल दिया| दोनों अपने बच्चों के शवों के लेकर चली गईं| वे रास्ते में कुछ देर विश्राम के लिए रुकीं, जहां उन दोनों को दो बहनें ओरी और शीतला मिली|

दोनों ही अपने सिर में जुओं से परेशान थीं| उन बहुओं को दोनों बहनों को ऐसे देख दया आई और वे दोनों की जुएं निकालने लगीं| कुछ देर बाद दोनों बहनों को आराम मिला| आराम मिलते ही दोनों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम्हारी गोद हरी हो जाए| इस बात को सुन दोनों बहुएं रोने लगी और अपने बच्चों के शव दिखाए| ये सब देख शीतला ने दोनों से कहा कि कर्मों का फल इसी जीवन में मिलता है|

यह बात सुनकर वे दोनों समझ गईं कि यह कोई और नहीं बल्कि स्वयं शीतला माता हैं| इसके बाद दोनों ने माता से माफ़ी मांगी और कहा कि आगे से शीतला सप्तमी के दिन वे कभी भी ताजा खाना नहीं बनाएंगी| इसके बाद माता ने दोनों बच्चों को फिर से जीवित कर दिया| इसके बाद से ही शीतला सप्तमी का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाने लगा|

 

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